By संतोष उत्सुक | Jan 30, 2026
बर्फ ऐसी सुन्दर सजीली प्रेमिका है जो इंसान को खूब इंतज़ार करवाती है। बर्फ को प्रकृति का वरदान भी माना जाता है जिसे प्राप्त करने के लिए पूजा, पाठ, हवन यज्ञ भी किए जाते हैं लेकिन उससे पहले राजनीतिक और सामाजिक स्वार्थ पूरे करने के लिए लाखों वृक्ष फना किए जाते हैं तभी तो लोकप्रिय नेताओं की आहुतियों के वावजूद बर्फ नहीं पड़ती। सरकार का मौसम विभाग अनुमान छपवाता है कि क्रिसमस पर नहीं पड़ी तो नए वर्ष पर पड़ सकती है। उपरवाले के यहां क्रिसमस, नया साल या मकर संक्रांति जैसे दुनियावालों के बनाए हुए पर्व नहीं होते। वहां तो जिन ऊंचे पहाड़ों पर कुदरती नमी और ठंडक का संतुलन बन जाए, वहीँ बर्फ के फाहे आसमान से उतरने शुरू हो जाते हैं ।
ठंड से कांपा प्रदेश। खौफ़नाक मंज़र। भारी बारिश, तूफ़ान, बर्फ गिरने से क्षेत्र की दो सौ अडतीस सड़कें बंद हो गई। पांच हज़ार सात सौ पचहत्तर ट्रांसफार्मर ठप। बत्तीस घंटे का बलैक आउट। मंत्रीजी उदघाटन करने नहीं आ सके। उनकी कई साल की मेहनत पर बर्फ ने पानी फेर दिया। खंबे तोड़े, बिजली बंद, इंटरनेट बंद, आम जन परेशान। इंटरनेट ऐसा होना चाहिए जो किसी भी स्थिति में चलता रहे। उदघाटन ऑनलाइन हो सकता है। सड़कें दरुस्त करने के लिए जेसीबी मंगवाई, कई खराब, कम चालक, पेट्रोल पम्प दूर। सरकारी अफसर का महत्तवपूर्ण बयान, वर्षा एवं बर्फबारी के दृष्टिगत सभी स्तरों पर, समुचित प्रबंध किए जा चुके हैं। लेकिन प्रशासन बर्फ में ध्वस्त यानी बर्फ न गिरती तो प्रशासन एक बार फिर ध्वस्त होने से बच जाता।
जिन स्थानों पर बर्फ नहीं पड़ती वीडियो बनाने वालों ने वहां पर गिरती बर्फ के नकली फोटो और वीडियो पोस्ट किए और पर्यटकों को गुमराह किया। उन बेचारों के बस में इतना ही था। हां, बर्फ पड़ने से कारोबारियों के चेहरे खिल उठे। उन्होंने कमरों के मनमाने दाम वसूले, गर्म पानी की बाल्टी महंगी बेची। टैक्सी चालकों ने मौके का फायदा उठकर कुछ किलोमीटर के हज़ारों बनाए। बदइंतजामी की ज़िम्मेदारी की काली बर्फ, सरकारी विभागों ने एक दूसरे पर लगातार फेंकी। प्रशासन आने वाली तारीखें छापकर बता रहा है कि बर्फ गिरने की संभावना है, ऐसा लगता है खबरदार रहें, संभावना नहीं आशंका है।
- संतोष उत्सुक