By अनन्या मिश्रा | Aug 01, 2026
अक्सर लोगों को लगता है कि डिप्रेशन की समस्या होने पर उनको रोना, मन उदास होना, अकेलापन आदि होगा। लेकिन डिप्रेशन इससे भी कहीं ज्यादा गंभीर है। WHO के मुताबिक डिप्रेशन एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें लंबे समय तक व्यक्ति का उदास रहता है। या फिर व्यक्ति को जिन कार्यों में रुचि थी, उनमें रुचि खत्म हो जाती है। WHO के अनुसार, दुनियाभर में करीब 4.6% पुरुष और 6.9% महिलाएं डिप्रेशन से प्रभावित हैं।
महिलाओं में पुरुषों की तुलना में डिप्रेशन की संभावना 1.5 गुना ज्यादा होती है। आमतौर पर महिलाओं में डिप्रेशन की वजह हार्मोनल बदलाव हो सकता है। पीरियड्स से पहले होने वाले बदलाव, मेनोपॉज, प्रेग्नेंसी और पोस्टपार्टम डिप्रेशन शामिल हैं। वहीं महिलाएं अपने इमोशन्स खुलकर बताती हैं। ऐसे में उनके लक्षण जल्दी पहचान में आ जाते हैं। वहीं महिलाओं को खासतौर पर इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।
बिना कारण रोने का मन होना।
हर समय घबराहट या चिंता महसूस होना।
हमेशा खालीपन या उदासी महसूस होना
खुद को हर समय दोष देना या फिर अपराधबोध महसूस करना
हर समय थकान लगना।
लोगों से मिलने का मन न होना।
पहले जो काम अच्छे लगने थे, उनमें अब इंट्रेस्ट खत्म होना।
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक पुरुषों में डिप्रेशन कई बार अलग तरीके से दिखता है। कई पुरुषों को उदासी की जगह व्यवहार में बदलाव दिखता है। इसलिए पुरुषों को अपने बर्ताव पर ध्यान देने की जरूरत है।
हर समय चिड़चिड़ापन होना।
हिंसक होना।
छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा होना।
खुद को जरूरत से ज्यादा काम में व्यस्त रखना।
ज्यादा शराब, स्मोकिंग या अन्य नशे का सहारा लेना।
दोस्तों और परिवार से दूरी बनाना।
अपनी फीलिंग्स को दूसरों के साथ शेयर नहीं करना।
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक कई पुरुष अपनी उदासी को गुस्से के जरिए दिखाते हैं। डिप्रेशन में पुरुषों के व्यवहार में बदलाव आने लगते हैं। यही वजह है कि परिवार के लोग भी नहीं समझ पाते हैं कि वह डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। पुरुषों को बचपन से इमोशंस अपने तक रखने और मजबूत रहने की सलाह दी जाती है। इसलिए पुरुषों का डिप्रेशन का जल्दी पता नहीं चल पाता है। जिसका नतीजा कई बार आत्महत्या तक भी पहुंच जाता है।
वहीं महिलाएं अपने इमोशन्स को खुलकर जाहिर करती हैं। इसलिए उनमें डिप्रेशन के लक्षण जल्दी पहचान में आ जाते हैं। साथ ही महिलाएं मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेने में नहीं हिचकती हैं।