By अनन्या मिश्रा | Mar 09, 2026
शरीर को हेल्दी और फिट रखने के लिए हम सभी अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में कई तरह के सुधार करते हैं। लेकिन क्या यह काफी होता है। जिसका जवाब है नहीं। क्योंकि हम जिस तरह की लाइफस्टाइल फॉलो करते हैं, जो कुछ खाते-पीते हैं, इन सबका हमारी सेहत पर असर होता है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग खाना, नींद और मानसिक शांति को नजरअंदाज कर देते हैं। जिसका असर धीरे-धीरे शरीर और दिमाग पर भी पड़ता है। वहीं हमारा लोगों के प्रति कैसा व्यवहार है, यह भी सेहत को प्रभावित करने वाली स्थिति हो सकती है।
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो ज्यादा गुस्सा आना सिर्फ स्वभाव की बात नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई मानसिक, जैविक और सामाजिक वजह हो सकती है। जब व्यक्ति चिंता, तनाव, नींद की कमी या हार्मोनल असंतुलन से गुजरता है, तो मस्तिष्क का भावनाओं को कंट्रोल करने वाला हिस्सा अमिगडाला अधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे जल्दी गुस्सा आता है।
लंबे समय तक तनाव में रहना भी गुस्से की समस्या को बढ़ाने वाला हो सकता है।
वहीं बचपन के पारिवारिक विवाद, ट्रॉमा, काम का तनाव और आर्थिक दबाव भी अधिक गुस्सा आने की वजह हो सकता है।
इसके अलावा नींद की कमी से कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं। जिससे शरीर फाइट मोड में रहता है। इस कारण भी आपको गुस्सा आ सकता है।
अधिक गुस्सा आने पर हमारे शरीर में कई जैविक बदलाव होते हैं। ऐसे में आपके दिल की धड़कन भी तेज होने लगती है, बीपी बढ़ने लगता है और मांसपेशियों में भी तनाव आ सकता है।
वहीं जो लोग अक्सर गुस्से में रहते हैं, उनके शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ा रह सकता है। जिससे क्रॉनिक बीमारियों, दिल की सेहत और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। गुस्सा मानसिक सेहत पर निगेटिव असर डालता है।
बार-बार गुस्सा करने से मस्तिष्क में निगेटिव सोच का पैटर्न विकसित होता है। जिससे जातक असंतुष्ट, चिड़चिड़ा और मानसिक रूप से अस्थिर हो सकता है।
जब हम ज्यादा गुस्से में होते हैं, तो शरीर में एड्रेनालिन हार्मोन तेजी से बढ़ता है। जिस कारण दिल तेजी से पंप करता है और रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं।
इससे बीपी अचानक बढ़ जाता है। वहीं लगातार यह स्थिति बनी रहने पर आप हाई बीपी का शिकार हो सकते हैं।
हाई ब्लड प्रेशर की वजह से किडनी, मस्तिष्क और दिल पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।
गुस्से के दौरान दिल की धड़कन बढ़ जाती है और रक्त वाहिकाओं पर भी दबाव पड़ता है। इससे हृदय को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और इससे समय के साथ हृदय कमजोर हो सकता है।
कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि बार-बार गुस्सा करने वाले लोगों में हार्ट अटैक का जोखिम 2 से 3 गुना तक बढ़ सकता है।
कई बार गुस्से की स्थिति शरीर में सूजन को बढ़ाने वाली हो सकती है। जिससे धमनियों में प्लाक जमा होने और ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है।