Anil Ambani का Supreme Court में बड़ा वादा- बिना इजाजत देश नहीं छोडूंगा, Bank Fraud केस में हलफनामा

By अभिनय आकाश | Feb 19, 2026

अनिल  अंबानी ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया है कि संबंधित कंपनियों में उनकी भूमिका केवल गैर-कार्यकारी निदेशक की थी और वे इन कंपनियों के दैनिक प्रबंधन या परिचालन मामलों में शामिल नहीं थे। यह बयान अनिल डी अंबानी की ओर से ईएएस सरमा बनाम भारत संघ एवं अन्य नामक जनहित याचिका में दायर किए गए शपथपत्र/अनुपालन हलफनामे में दिया गया है। इस याचिका में अनिल अंबानी समूह की कंपनियों से जुड़े 1.5 लाख करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। हलफनामे में अंबानी ने कहा है कि वे मामले के तथ्यों से पूरी तरह अवगत हैं और शपथ लेने के लिए सक्षम हैं। उन्होंने कहा है कि न्यायिक अभिलेख में स्पष्टता, पूर्णता और प्रक्रियात्मक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह हलफनामा दायर किया जा रहा है ताकि न्यायालय को व्यापक तथ्यात्मक परिदृश्य की जानकारी रहे।

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उन्होंने वचन दिया है कि यदि विदेश यात्रा की कोई आवश्यकता उत्पन्न होती है, तो वे ऐसी यात्रा करने से पहले सर्वोच्च न्यायालय से पूर्व अनुमति प्राप्त करेंगे।

हलफनामे में यह भी दर्ज है कि वे चल रही जांचों के संबंध में जांच एजेंसियों के साथ पूरी ईमानदारी से सहयोग कर रहे हैं और आगे भी पूरा सहयोग देते रहेंगे। उन्होंने खुलासा किया है कि उन्हें प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 26 फरवरी, 2026 को पेश होने के लिए तलब किया गया है और उन्होंने उक्त तिथि को उपस्थित होकर जांच में शामिल होने का वचन दिया है।

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आगे यह भी कहा गया है कि न्यायालय में कार्यवाही लंबित रहने के दौरान धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 50 के तहत एक जांच की जा रही है। अंबानी ने दावा किया है कि उनके दिए गए आश्वासनों और निरंतर सहयोग को देखते हुए, उनके भागने का कोई खतरा नहीं है और उनका कानून की प्रक्रिया से बचने का कोई इरादा नहीं है। हलफनामे में यह कहा गया है कि इसे सद्भावनापूर्वक और सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष सही तथ्यात्मक और वचनबद्ध स्थिति प्रस्तुत करने के हित में दायर किया गया है। सत्यापन पृष्ठ से पता चलता है कि इसे 18 फरवरी, 2026 को मुंबई में सत्यापित किया गया था। यह मामला पूर्व आईएएस अधिकारी ई.ए.एस. सरमा द्वारा दायर एक जनहित याचिका से संबंधित है, जिसमें कथित बैंक धोखाधड़ी की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने पहले सीबीआई और ईडी को इस मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था, और कार्यवाही अभी भी लंबित है।

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