By अंकित सिंह | Jun 08, 2022
देश में समय-समय पर धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग उठती रहती है। बिहार में भी धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग कुछ नेताओं की ओर से लगातार की जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बिहार में भी धर्मांतरण विरोधी कानून आएगा? ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि ज्यादातर भाजपा शासित राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून आ चुका है। बिहार में भी भाजपा गठबंधन की सरकार है। आज इसी को लेकर बिहार में गठबंधन की सरकार का नेतृत्व कर रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सवाल पूछा गया। कुमार ने साफ तौर पर कह दिया कि फिलहाल बिहार में धर्मांतरण विरोधी कानून की कोई जरूरत नहीं है। दरअसल, बिहार में धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर चर्चा लगातार जारी थी। राज्य में इस कानून की आवश्यकता लगातार बताई जा रही है।
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह जैसे भाजपा नेता धर्मांतरण विरोधी कानून की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। जाति जनगणना के मुद्दे पर नीतीश और भाजपा के बीच वैचारिक विभाजन भी सामने आया है। भाजपा के नेता, जिसमें नीतीश मंत्रिमंडल में शामिल पार्टी के कुछ मंत्री सहित, रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के बिहार में घुस आने का आरोप लगाते रहे हैं और उनकी मांग है कि इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि उन्हें राज्य में प्रस्तावित जाति आधारित गणना में शामिल करके उनके प्रवास को वैध न बनाया जाए। नब्बे के दशक से राजनीतिक साथी होने के बावजूद, नीतीश के अयोध्या, अनुच्छेद 370, समान नागरिक संहिता, तीन तालक, एनआरसी और जनसंख्या नियंत्रण के लिए विधायी उपायों जैसे मुद्दों पर भाजपा जैसे विचार नहीं रहे हैं।