By Ankit Jaiswal | Oct 04, 2026
भारत में बिना इंटरनेट के भी संदेश भेजने वाले बिटचैट ऐप को लेकर सरकार की कार्रवाई सामने आई है। एप्पल ने भारत में अपने ऐप स्टोर से बिटचैट को हटा दिया है। कंपनी की ओर से यह कदम आईटी मंत्रालय की ओर से भेजे गए निर्देश के बाद उठाया गया है। इस कार्रवाई के बाद भारत में आईफोन इस्तेमाल करने वाले लोग अब आधिकारिक ऐप स्टोर से बिटचैट डाउनलोड नहीं कर सकेंगे।
एप्पल ने अपनी सूचना में यह भी स्पष्ट किया है कि बिटचैट दूसरे देशों और क्षेत्रों में पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। हालांकि, भारत में इसका ट्रायल संस्करण भी अब उपलब्ध नहीं होगा। बिटचैट का ट्रायल संस्करण टेस्टफ्लाइट के जरिए डेवलपर अपने ऐप के शुरुआती और जांच वाले संस्करण लोगों तक पहुंचाते हैं। एप्पल ने भारत में इस सुविधा के जरिए बिटचैट के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी है।
गौरतलब है कि बिटचैट सामान्य मैसेज भेजने वाले ऐप से कुछ अलग तरीके से काम करता है। इसे इस्तेमाल करने के लिए हर स्थिति में इंटरनेट कनेक्शन या किसी एक केंद्रीय सर्वर पर निर्भर रहना जरूरी नहीं होता है। यह आसपास मौजूद उपकरणों को ब्लूटूथ के जरिए आपस में जोड़कर एक नेटवर्क तैयार करता है। इसके बाद एक उपकरण दूसरे तक संदेश पहुंचा सकता है और इस तरह संदेश जुड़े हुए कई उपकरणों के जरिए आगे बढ़ सकता है।
यही तकनीक बिटचैट को उन परिस्थितियों में भी उपयोगी बनाती है, जब इंटरनेट सेवा उपलब्ध नहीं होती है। हालांकि, इसी अलग तरह की तकनीक और विकेंद्रीकृत ढांचे ने इसे भारत में सरकारी निगरानी और नियमों के दायरे में ला दिया है। सरकार की ओर से हटाने की कार्रवाई के बाद अब भारत में ऐप की आधिकारिक उपलब्धता पूरी तरह बंद हो गई है।
बता दें कि एप्पल ने अभी तक बिटचैट को भारत के ऐप स्टोर से हटाने के मामले में टाइम्स ऑफ इंडिया की ओर से भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया है। कंपनी ने यह भी सार्वजनिक रूप से नहीं बताया है कि सरकार ने जिस सामग्री को गैरकानूनी बताया है, वह वास्तव में किस तरह की थी।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली और मुंबई में बिटचैट को लेकर प्रदर्शन भी हुए हैं। ये प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से आयोजित किए गए थे। गौरतलब है कि बिटचैट के खिलाफ सरकार की ओर से जुलाई में भी कार्रवाई की गई थी। उस समय ऐप को हटाने की कोशिश के बाद यह दोबारा उपलब्ध हो गया था। अब एक बार फिर भारत में इसकी उपलब्धता रोक दी गई है।
इस कार्रवाई के बाद बिटचैट की गोपनीयता, बिना इंटरनेट संचार और विकेंद्रीकृत तकनीक को लेकर चर्चा और बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही यह भी सवाल उठ रहे हैं कि भारत में ऐसे ऐप्स के लिए नियम और सरकारी निर्देश किस तरह लागू किए जाते हैं।