FSSAI लैब ने Dairy Whitener को बताया असुरक्षित, Nestle India ने दी सफाई

By Ankit Jaiswal | Oct 04, 2026

दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित द ललित होटल से लिए गए नेस्ले इंडिया के एक डेयरी व्हाइटनर के नमूने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई ने शनिवार को बताया कि खाद्य विश्लेषक की लैब रिपोर्ट में इस नमूने को असुरक्षित और मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया है। हालांकि, नेस्ले इंडिया ने इस निष्कर्ष से असहमति जताते हुए अपने उत्पाद को पूरी तरह सुरक्षित बताया है।

एफएसएसएआई ने संबंधित कारोबारी को निर्धारित समय के भीतर खाद्य विश्लेषक की रिपोर्ट के खिलाफ अपील करने का मौका भी दिया है। इसके साथ ही नियामक ने पहचान किए गए उत्पाद की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है। हालांकि, एफएसएसएआई की सार्वजनिक जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रयोगशाला जांच में किस खास कमी या किस मानक के उल्लंघन के आधार पर उत्पाद को असुरक्षित और मानकों के अनुरूप नहीं माना गया है।

दूसरी ओर, नेस्ले इंडिया ने उत्पाद को सुरक्षित बताया है। कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, दूध में फास्फोरस प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है और इसी वजह से दूध से बने उत्पादों में भी इसकी कुछ मात्रा पाई जाती है। कंपनी का कहना है कि एफएसएसएआई की नीचे खबर को नए तरीके से, सरल और सामान्य पाठकों के लिए सहज भाषा में लिखा गया है। इसमें एफएसएसएआई, नेस्ले इंडिया और द ललित के पक्षों के साथ जांच से जुड़े अहम बिंदुओं को संतुलित रखा गया है।

दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित द ललित होटल से लिए गए नेस्ले इंडिया के एक डेयरी व्हाइटनर के नमूने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई ने शनिवार को बताया कि खाद्य विश्लेषक की प्रयोगशाला जांच में इस नमूने को असुरक्षित और मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया है। हालांकि, नेस्ले इंडिया ने इस निष्कर्ष से असहमति जताते हुए अपने उत्पाद को पूरी तरह सुरक्षित बताया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह नमूना भारत होटल्स लिमिटेड यानी द ललित, कनॉट प्लेस के परिसर से लिया गया था। एफएसएसएआई ने कहा है कि खाद्य विश्लेषक की रिपोर्ट में उत्पाद को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत तय नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया है। नियामक के अनुसार, जांच रिपोर्ट की एक प्रति संबंधित खाद्य कारोबारी को उपलब्ध करा दी गई है और उत्पाद के संबंध में नोटिस भी जारी किया गया है।

एफएसएसएआई ने संबंधित कारोबारी को निर्धारित समय के भीतर खाद्य विश्लेषक की रिपोर्ट के खिलाफ अपील करने का मौका भी दिया है। इसके साथ ही नियामक ने पहचान किए गए उत्पाद की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है। हालांकि, एफएसएसएआई की सार्वजनिक जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रयोगशाला जांच में किस खास कमी या किस मानक के उल्लंघन के आधार पर उत्पाद को असुरक्षित और मानकों के अनुरूप नहीं माना गया है।

दूसरी ओर, नेस्ले इंडिया ने उत्पाद को सुरक्षित बताया है। कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, दूध में फास्फोरस प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है और इसी वजह से दूध से बने उत्पादों में भी इसकी कुछ मात्रा पाई जाती है। कंपनी का कहना है कि एफएसएसएआई की लैब रिपोर्ट में दूध से मिलने वाले प्राकृतिक फास्फोरस को अलग किए बिना कुल फास्फोरस की मात्रा की तुलना उस सीमा से की गई है, जो खाद्य पदार्थ में अलग से मिलाए जाने वाले फास्फोरस के लिए तय है।

नेस्ले इंडिया ने दावा किया है कि उसका उत्पाद खाद्य सुरक्षा और मानक नियमों के तहत अलग से मिलाए जाने वाले फास्फोरस की तय सीमा के भीतर है। कंपनी ने यह भी कहा है कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत अधिकारियों के संपर्क में है और उसने इसी तरह के दूसरे दूध आधारित उत्पादों से जुड़ा आंकड़ा भी अधिकारियों को दिया है। कंपनी का कहना है कि इन आंकड़ों से दूध में प्राकृतिक रूप से मौजूद फास्फोरस की स्थिति को समझने में मदद मिलेगी।

बता दें कि द ललित ने भी इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। होटल के मुताबिक, यह उत्पाद नेस्ले इंडिया से खरीदा गया पैक किया हुआ सामान था और एफएसएसएआई की टीम ने करीब 3 महीने पहले होटल से इसका नमूना लिया था।

द ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विवेक शुक्ला ने कहा कि एफएसएसएआई से जानकारी मिलने के बाद होटल ने तुरंत नेस्ले इंडिया से संपर्क किया। कंपनी ने होटल को बताया कि वह सीधे एफएसएसएआई के सामने इस मामले का जवाब देगी। इसके बाद होटल ने उत्पाद का इस्तेमाल बंद कर दिया और सभी पैकेट अपने कामकाज से हटा दिए।

गौरतलब है कि होटल ने कहा है कि उत्पाद की नियमों के अनुसार स्थिति को लेकर मामला एफएसएसएआई और नेस्ले इंडिया के बीच है। होटल का कहना है कि उसने सूचना मिलने के बाद तुरंत कार्रवाई की है और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन जारी रखा है।

फिलहाल इस मामले में लैब रिपोर्ट और आगे की कानूनी प्रक्रिया अहम होगी। एफएसएसएआई की ओर से सार्वजनिक तौर पर जांच में पाई गई खास कमी बताए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद का मुख्य आधार क्या है।

प्रमुख खबरें

IIT Delhi के पीएचडी छात्र की मौत मामले में Supreme Court के निर्देश पर FIR दर्ज

BJP 2027 में Himachal Pradesh की सत्ता में लौटेगी: Shrikant Sharma

Mani Shankar Aiyar ने Pakistan से बातचीत की वकालत की, अटारी वाघा बॉर्डर पर वार्ता का दिया सुझाव

Israel के पीएम Netanyahu ने भारतीय पायलट Smit Machhar की बहादुरी को सराहा, स्वतंत्रता दिवस पर दिया न्योता