Arab Spring 2.0: फ्रांस, इटली, पोलैंड, ग्रीस, सर्बिया...सब जगह युवा क्यों कर रहे हंगामा?

By अभिनय आकाश | Oct 24, 2026

यूरोप की जो दुनिया को तरक्की, ताकत और लोकतंत्र का पाठ पढ़ाता है। आज उसी यूरोप की सड़कों पर गुस्सा उबल रहा है। फ्रांस से सर्बिया, इटली से स्पेन समेत यूरोप के कई देशों तक महंगाई, बेरोजगारी और मकानों के आसमान छूते किराए से युवा परेशान है। सड़कों पर प्रदर्शन, पुलिस से टकराव और अब विरोध का कैलेंडर। ऐसे में सवाल है क्या यूरोप में 2010 जैसी अरब स्प्रिंग की आहट सुनाई देने लगी है? फ्रांस से जो हिंसा शुरू हुई, जो प्रोटेस्ट शुरू हुआ वो धीरे-धीरे यूरोप के और भी कई देशों में फैल चुका है। कहीं युवा भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं, तो कहीं महंगाई और बेरोजगारी ने सरकारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हो रही हैं, जबकि कुछ देशों में छात्र आंदोलन इस मुकाम पर पहुंच चुके हैं जहां वे चुनावी राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं। 

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दूसरी तरफ, इटली में विरोध-प्रदर्शनों की स्थिति और भी गंभीर नजर आ रही है। बोलोग्ना में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों, वामपंथी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हिंसक झड़पों की खबरें हैं, जहां बैरिकेड्स जलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। वहीं, ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर ट्रक ड्राइवरों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल ने आर्थिक संकट की आशंका बढ़ा दी है। दक्षिणी इटली के कई इलाकों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की भारी किल्लत हो गई है, सुपरमार्केट में ताजे फल-सब्जियों और खाद्यान्न की सप्लाई ठप पड़ने लगी है, और कैप्री तथा इस्चिया जैसे द्वीपों की फेरी सेवाएं बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे हालात में सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। पोलैंड में भी बड़े पैमाने पर लोग विधायी सुधारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क और देश की संसद प्रजनन अधिकारों से जुड़े अपने वादों को पूरा करें। इस आंदोलन का मुख्य केंद्र सरकारी जवाबदेही और अधूरे चुनावी वादों को लागू कराना है।

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ग्रीस में भी एक बेहतर शिक्षा प्रणाली की मांग को लेकर हजारों छात्र और शिक्षक लामबंद हैं। एथेंस में करीब 10,000 लोगों ने मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि शिक्षा क्षेत्र के लिए बजट बढ़ाया जाए, स्कूलों की हालत सुधारी जाए, शिक्षकों का वेतन बढ़ाया जाए और युवाओं को किफायती आवास की सुविधा मिले। यानी यहां आंदोलन की मांगें शिक्षा की गुणवत्ता से लेकर लगातार बढ़ती जीवन-यापन लागत (महंगाई) तक फैली हुई हैं। इन सब के बीच, यूरोप की सबसे बड़ी राजनीतिक हलचल सर्बिया से सामने आ रही है। यहां छात्र आंदोलन अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनावी राजनीति में अपनी ताकत दिखाने की तैयारी कर रहा है। 25 अक्टूबर के चुनावों से पहले हजारों समर्थक राजधानी बेलग्रेड की ओर मार्च करते देखे गए हैं। इस आंदोलन की शुरुआत नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन की छत गिरने और उसमें 16 लोगों की मौत के बाद हुई थी। छात्रों ने इस हादसे के जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई और निर्माण कार्यों में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की मांग की थी। उनका आरोप है कि भ्रष्टाचार ने निर्माण की गुणवत्ता और जवाबदेही को पूरी तरह खत्म कर दिया है। धीरे-धीरे इस आंदोलन को आम नागरिकों, किसानों, शिक्षकों और अन्य वर्गों का व्यापक समर्थन मिलने लगा। अब यह आंदोलन चुनावी मैदान में उतर चुका है, जहां "स्टूडेंट्स विन" नाम से 250 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं; इनमें विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, कलाकार, किसान और यहां तक कि एक लोकप्रिय रैपर भी शामिल हैं।

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