क्या Hyrox जैसे महंगे Events एक 'Fitness Scam' हैं? हजारों की फीस पर यूजर्स ने उठाए सवाल

By Ankit Jaiswal | Apr 17, 2026

इन दिनों फिटनेस की दुनिया तेजी से चर्चा का विषय बन गई है। शहरों में बढ़ते फिटनेस इवेंट्स, खासकर हाय्रोक्स को लेकर लोग दो हिस्सों में बंटते नजर आ रहे हैं। कुछ लोग इसे फिटनेस का नया ट्रेंड मान रहे हैं, तो कुछ इसे दिखावे और स्टेटस का जरिया बता रहे हैं।

दरअसल, इस बहस की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर एक यूजर अनकित केडिया का पोस्ट वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने ऐसे आयोजनों की बढ़ती लागत पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि फिट रहना अच्छी बात है, लेकिन एक दिन के इवेंट पर इतना खर्च करना क्या सही है, यह ज्यादा दिखावे जैसा लगता है। बता दें कि इसी के साथ मैराथन और दूसरे फिटनेस आयोजनों की फीस को लेकर भी लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अब कई बड़े शहरों में ऐसे आयोजनों की फीस 3 हजार से 5 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा प्रतिभागियों को अलग से बिब नंबर, टाइमिंग चिप और मेडल जैसी चीजों के लिए भी भुगतान करना पड़ता है। गौरतलब है कि इन आयोजनों में शामिल होना अब सिर्फ फिटनेस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नेटवर्किंग और सोशल सर्कल बढ़ाने का भी एक माध्यम बनता जा रहा है।

हालांकि, इस पूरे मुद्दे पर एक दूसरा पक्ष भी सामने आता है। कुछ लोग मानते हैं कि ऐसे इवेंट्स सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि एक अनुभव होते हैं। इनसे लोगों को अपनी फिटनेस को मापने का एक मानक मिलता है और एक सामूहिक ऊर्जा का माहौल तैयार होता है, जो उन्हें अपनी सीमाओं से आगे जाने के लिए प्रेरित करता है।

बेंगलुरु की कुछ पेशेवर महिलाओं ने भी इस तरह के आयोजनों को सकारात्मक बदलाव बताया है। उनका मानना है कि भारत में लोग अब सिर्फ खेल देखने वाले नहीं, बल्कि खुद उसमें भाग लेने वाले बन रहे हैं। गौरतलब है कि इस बदलाव को फिटनेस संस्कृति के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर कई लोग इसे "फिटनेस स्कैम" भी कह रहे हैं। उनका तर्क है कि भारी फीस देकर सिर्फ एक टैग या अनुभव हासिल करना जरूरी नहीं है। उनके मुताबिक, असली फिटनेस रोजमर्रा की मेहनत और अनुशासन से आती है, न कि महंगे आयोजनों से।

अगर व्यापक नजरिए से देखें तो ऐसे इवेंट्स पारंपरिक वर्कआउट को एक बड़े मंच और अनुभव में बदल देते हैं, जहां दौड़ना, वजन उठाना और अन्य गतिविधियां एक तय प्रारूप में की जाती हैं। भारत जैसे देश में, जहां फिटनेस संस्कृति अभी विकसित हो रही है, ऐसे आयोजन लोगों में प्रतिस्पर्धा और लक्ष्य आधारित ट्रेनिंग की सोच को बढ़ावा दे रहे हैं।

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