भारत-चीन तनाव के बीच भारतीय सेना और नौसेना प्रमुख ने दिया बड़ा बयान

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 21, 2022

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव तो कम हो गया है लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसी बीच सेना प्रमुख और नोसैना प्रमुख के जो बयान आये हैं वह दर्शाते हैं कि चीन कठिन चुनौती बना हुआ है और भारत हर स्थिति का सामना करने के लिए अपनी तैयारियां कर रहा है। हम आपको बता दें कि सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा है कि पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध से कुछ प्रमुख सीख मिलीं, जिनमें ‘‘हर समय उच्च स्तर की परिचालन तैयारियों बनाये रखना’’ और बुनियादी ढांचे में सुधार करना शामिल है। उन्होंने ‘इंडिया डिफेंस कॉन्क्लेव’ में हुई परिचर्चा के दौरान एक सवाल के जवाब में यह बात कही। मेजबान द्वारा यह पूछे जाने पर कि पूर्वी लद्दाख में गोगरा-हॉटस्प्रिंग में ‘पेट्रोलिंग पॉइंट 15’ से भारतीय और चीनी सैनिकों के हाल में पीछे हटने के बाद अगला कदम क्या है, इस पर जनरल पांडे ने कहा, ‘‘हमने गतिरोध वाले बिंदुओं से सैनिकों के पीछे हटने के संदर्भ में प्रगति की है। हमारे पास अभी भी गतिरोध वाले दो बिंदु हैं, जहां हमें प्रगति करने की आवश्यकता है।'' उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि हम इन गतिरोध वाले बिंदुओं को लेकर समाधान निकाल लेंगे।’’ इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।’’

नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने इसके साथ ही कहा है कि जहाजों और पनडुब्बियों के उत्पादन से लेकर कलपुर्जों एवं हथियारों तक, भारतीय नौसेना 2047 तक ‘‘पूरी तरह से’’ आत्मनिर्भर होगी। एडमिरल कुमार ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष से बहुत कुछ सीखने को है, जिसमें नयी तकनीक, साइबर स्पेस और सभी तरह के गोला-बारूद का उपयोग देखा गया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संघर्ष ने किसी भी देश की रक्षा के लिए ‘आत्मनिर्भरता’ की आवश्यकता को रेखांकित किया है। ‘इंडिया डिफेंस कॉन्क्लेव’ 2022 के दौरान सवालों के जवाब में एडमिरल कुमार ने कहा, ‘‘2047 तक, हमारे पास एक पूर्ण स्वदेशी नौसेना होगी, चाहे वह जहाज हो, या पनडुब्बी, विमान, मानव रहित प्रणाली, हथियार आदि।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण भारतीय नौसेना की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, उन्होंने कहा, ‘‘अब तक, हम पर कोई कड़ा दबाव नहीं है। हमारे पास पर्याप्त भंडार है। आज विमान या विमान की तैनाती के मामले में कोई कमी नहीं की गई है। हमने अपने देश के उद्योग से मदद लेने के लिए कदम उठाए हैं।’’

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