By अभिनय आकाश | Jul 11, 2026
7 किलो वजन, 800 मीटर की रेंज और दुश्मन का नामोनिशान मिटाने की शक्ति। आधुनिक युद्ध अब जज्बे के साथ-साथ सही तकनीक से जीते जाते हैं और भारतीय सेना ने अब वह तकनीक साबित हासिल करने का मन बना लिया है जो पलक झपकते ही दुश्मन के बंकरों को कब्रिस्तान में बदल देगी। भारत सरकार ने 450 यूनिट कार्ल गुस्टाफ मार्क चार रॉकेट लांचर के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी आरएफपी जारी कर दिया है। यह वही हथियार है जिसका नाम सुनते ही दुश्मन की बख्तरबंद गाड़ियों के ड्राइवर रास्ता बदल देते हैं। दरअसल भारतीय सेना दशकों से काल गुस्टाफ का इस्तेमाल कर रही है। हमने इसका मार्क 2 और मार्क 3 देखा है। लेकिन मार्क चार क्यों खास है? इसकी सबसे बड़ी वजह है वजन का खेल। पुराने लॉन्चर को उठाकर पहाड़ों पर चढ़ना किसी सजा से कम नहीं था। मार्क 3 का वजन लगभग 10 किलो था। लेकिन मार्क चार सिर्फ 7 कि.ग्र. का है। एक सैनिक के लिए 3 किग्र वजन कम होने का मतलब है ज़्यादा गोलियां ले जाने की क्षमता और तेज गति।
सेना ने आरएफपी में स्पष्ट शर्त रखी है कि हथियार को इन दोनों चरम स्थितियों में 100% सटीक होना होगा। इसका मतलब है कि चाहे गलवान की बर्फीली घाटी हो या कक्ष का रेगिस्तान कालगुफ मार्क चार हर जगह भारत का कवच बनेगा। यह इनफेंट्री मॉडर्नाइजेशन का वो हिस्सा है जो सीधे फ्रंट लाइन सोल्जर के हाथ में सबसे घातक शक्ति दे रहा है।