पाकिस्तानी सैनिकों की लाशें तक घसीटकर ले गया तहरीक-ए-तालिबान, मचा भयंकर बवाल!

चीख पुकार मची हुई है और आधी रात से कोएटा की सड़कों पर सिर्फ आग और बारूद का तांडव दिख रहा है। लेकिन इस बार गुस्सा सिर्फ आतंकियों के खिलाफ नहीं है। इस बार पाकिस्तान की जनता ने बंदूक तान दी है। खुद अपनी ही फौज के खिलाफ।
पाकिस्तान के अंदर इस वक्त वो महा बगावत शुरू हो चुकी है जो शहबाज सरकार और जनरल आसिम मुनीर के ताबूत में आखिरी कील ठोकने वाली है। तहरीक तालीबान पाकिस्तान यानी कि टीटीपी के आतंकियों ने सरेआम पाकिस्तानी पुलिस वालों को अगवा कर लिया। उन्हें ये उठाकर ले गए। जिसके बाद पूरे मुल्क में हाहाकार मचा हुआ है। चीख पुकार मची हुई है और आधी रात से कोएटा की सड़कों पर सिर्फ आग और बारूद का तांडव दिख रहा है। लेकिन इस बार गुस्सा सिर्फ आतंकियों के खिलाफ नहीं है। इस बार पाकिस्तान की जनता ने बंदूक तान दी है। खुद अपनी ही फौज के खिलाफ। हजारों की भीड़ सड़कों पर है। रास्ते जाम है और पाकिस्तान की सेना के मुंह पर सरेआम नारे लग रहे हैं। यह जो दहशतगर्दी है इसके पीछे वर्दी है और शेमशेम के नारों से पूरा क्वेटा गूंज रहा है।
इसे भी पढ़ें: उधर पाकिस्तान पर बड़ा हमला, इधर भारत पहुंच गए तालिबानी मंत्री
जनरल मुनीर और उसकी फौज का वो घिनौना काला चेहरा जो आपको भी हैरान कर देगा और झकझोर कर रख देगा। जब क्वटा और जियारत में टीटीपी के आतंकी पुलिस अफसरों को गोलियों से ढूंढ रहे थे। धमाके कर रहे थे। 3 घंटे तक पाकिस्तानी सेना ने घटना स्थल पर नहीं भेजी। आतंकी पुलिस अधिकारियों की लाशें तक उठाकर ले गए। लेकिन बुज़दिल फौज ने उन्हें ढूंढने की कोशिश तक नहीं की। और जब जियारत में इनके जो परिजन है यह खुद अपनी जान पर खेलकर लाशें बरामद करने लगे तो क्रेडिट लेने के लिए पाकिस्तानी सेना की फ्रंटियर कॉर यानी कि एफसी के जवान वहां पहुंच गए। उन्होंने जबरन परिजनों से वो लाशें छीन ली। रोते-बिलखते परिवारों को सौंपने की जगह जबरन पुलिस लाइन ले जाई जाने लगी। इसी बात पर वो बवंडर उठा है कि मृतक पुलिसकर्मियों के परिजनों ने सिविल अस्पताल में घुसकर पाकिस्तानी सेना के जवानों को दौड़ा दौड़ा कर खदेड़ दिया। अपनी ही सेना को जनता ने लात घूसे मारकर भगा दिया। यह गुस्सा यूं ही नहीं भड़का है। स्थाई लोगों का साफ मानना है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना जो आम नागरिकों पर जुल्म ढा रही है, बेगुनाहों को गायब कर रही है, उसी की वजह से यह आतंकी हमले बड़े हैं।
इसे भी पढ़ें: नक्सलवाद के बाद घुसपैठ पर निर्णायक प्रहार, अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा के अगले चरण का बिगुल फूंका
अब सेना की इस नाकामी की कीमत वहां की पुलिस और आम जनता को चुकानी पड़ रही है। शवों को अपने कब्जे में लेकर परिजन अस्पताल के बाहर डटे हुए हैं। बगावत अपने चरम पर है क्वटा में और यह सब कुछ तब हो रहा है जब पाकिस्तान पहले ही चारों तरफ से सुलग रहा है। एक तरफ पीओके यानी कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर यहां पर मुल्क के हुक्मरानों के खिलाफ जनता सड़कों पर है। आक्रोश बहुत भयंकर है। पीओके पहले ही पाकिस्तान से आजादी की मांग कर रहा है। वहां की आग ठंडी नहीं हो रही तो दूसरी तरफ पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान भी अब धीरे-धीरे पूर्ण आजादी की तरफ बढ़ रहा है। बलोच विद्रोही अंधाधुंध पाकिस्तानी फौजियों को चुन-च कर मान रहे हैं। इतिहास गवाह है कि जो मुल्क दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है एक दिन वो खुद उसी में दफन हो जाता है। भारत के खिलाफ आतंकवाद की फैक्ट्री चलाने वाला पाकिस्तान आज अपने ही पाले हुए सांपों के डंक से तड़प रहा है। पीओके हाथ से निकला जा रहा है। बलूचिस्तान आजाद होने को तैयार है और अब क्वेटा जियारत की सड़कों पर सेना के खिलाफ फूटा यह जन आक्रोश यह बता रहा है कि पाकिस्तान के टुकड़े होने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है।
अन्य न्यूज़














