By Prabhasakshi News Desk | Mar 05, 2025
हाल ही में 16वें बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (बीआईएफएफ) के उद्घाटन समारोह में फिल्म इंडस्ट्री के लोगों के शामिल नहीं होने पर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की टिप्पणी ने फिल्म महोत्सव में हंगामा खड़ा कर दिया है। इस मामले को लेकर शिवकुमार की भाषा के बारे में एक बहस हुई है। जहां उन्होंने कड़े शब्दों में फिल्म समुदाय से कहा था कि फिल्म निर्माण सरकार के समर्थन के बिना नहीं हो सकता है और वह जानते हैं कि "नट और बोल्ट" को कैसे कसना है। इसको लेकर अभिनेताओं और फिल्म निर्माताओं का मानना है कि फिल्म महोत्सवों को सरकार से अलग करना महत्वपूर्ण था।
तो वहीं, 16वें बीआईएफएफ के राजदूत और अभिनेता किशोर ने कहा कि हालांकि आयोजकों और फिल्म समुदाय के बीच संवादहीनता है, डीके शिवकुमार को अपनी टिप्पणियों में अधिक उचित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए था। इसके अलावा वैभवी थिएटर के मालिक और कर्नाटक फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष एम नरसिम्हालु ने कहा कि आम तौर पर मशहूर हस्तियां तब तक सार्वजनिक प्रस्तुति नहीं देती हैं जब तक उन्हें आमंत्रित नहीं किया जाता है।
उन्होंने कहा, "अगर मशहूर हस्तियों और फिल्म समुदाय के सदस्यों को पहले आमंत्रित किया गया होता, तो वे जरूर आते।" मानसो रे ने यह भी कहा कि महामारी के दौरान पानी के लिए पदयात्रा में साधु कोकिला की भागीदारी पर डीकेएस की टिप्पणी एक अभिनेता और संगीतकार के रूप में तीन दशकों से अधिक समय तक कन्नड़ फिल्म उद्योग में उनके योगदान का अपमान है। साधु कोकिला वर्तमान में कर्नाटक चलचित्र अकादमी के अध्यक्ष हैं।