By Ankit Jaiswal | Oct 23, 2026
भारत में मोबाइल फोन बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब सरकार की नजर अपना मोबाइल ब्रांड तैयार करने पर है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दावा किया है कि 23 अक्टूबर 2028 तक देश में ऐसे मोबाइल फोन उपलब्ध होंगे, जिन्हें भारतीय कंपनियां डिजाइन करेंगी, भारत में ही बनाएंगी और अपने ब्रांड के नाम से बेचेंगी। उनका कहना है कि भारत भी मोबाइल फोन के कारोबार में एप्पल और सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों के बराबर अपनी पहचान बना सकता है।
मोबाइल फोन तैयार करना कितना मुश्किल काम है, इसे समझाने के लिए मंत्री ने बातचीत के दौरान एनडीटीवी के प्रधान संपादक राहुल कंवल से उनका मोबाइल फोन भी लिया। उन्होंने बताया कि एक छोटे से फोन में रेडियो तरंगों के जरिए संचार करने की व्यवस्था, एंटीना, गणना करने वाला हिस्सा, मेमोरी, कैमरा, स्क्रीन और बिजली को नियंत्रित करने वाले कई उपकरण लगाने पड़ते हैं। इन सभी हिस्सों को कम जगह में इस तरह जोड़ना होता है कि फोन का वजन, बिजली की खपत और काम करने की क्षमता सही बनी रहे। यही वजह है कि मोबाइल फोन का डिजाइन तैयार करना काफी जटिल होता है।
मंत्री के मुताबिक, करीब 3 साल पहले भारतीय डिजाइनरों को मोबाइल फोन के मुख्य सर्किट बोर्ड को खुद तैयार करने की चुनौती दी गई थी। इस पहल में 2 कंपनियां आगे आईं। इनमें से एक कंपनी का डिजाइन एक बड़ी अमेरिकी दूरसंचार सर्विस प्रोवाइडर कंपनी ने चुना। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि उस भारतीय कंपनी ने 5जी से आगे की तकनीक वाला मोबाइल फोन तैयार करके संबंधित कंपनी को दिया है और यह फोन ग्राहकों तक भी पहुंच चुका है। उनके अनुसार, पिछले साढ़े 3 वर्षों में भारत ने ऐसी तकनीक विकसित करने की क्षमता हासिल की है, जिसका इस्तेमाल अब अपना मोबाइल ब्रांड बनाने में किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि मोबाइल फोन का भारतीय डिजाइन, ब्रांड और उससे जुड़ी बौद्धिक संपदा देश में ही रहे। मंत्री ने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसे फोन बड़ी संख्या में बिकेंगे। हालांकि, बाजार में उनकी सफलता कीमत, गुणवत्ता, तकनीकी सुविधाओं और ग्राहकों के भरोसे पर निर्भर करेगी।
गौरतलब है कि अश्विनी वैष्णव ने देश में विनिर्माण क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए पिछली कांग्रेस सरकारों की नीतियों की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि 1990 के बाद आर्थिक बदलावों से मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला, लेकिन 2004 से 2014 के बीच नियंत्रण वाली नीतियों के कारण काम प्रभावित हुआ। उनके मुताबिक, 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए घरेलू निर्माण को बढ़ावा दिया है।
मंत्री ने कहा कि भारत अब मोबाइल फोन, ड्रोन, मिसाइल, रेलगाड़ियों और आधुनिक उपकरणों का निर्माण कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इलेक्ट्रॉनिक सामान देश से निर्यात होने वाली तीसरी सबसे बड़ी श्रेणी बन चुका है और जल्द ही दूसरे स्थान पर पहुंच सकता है। ऐसे में भारतीय मोबाइल ब्रांड की योजना देश में तकनीकी क्षमता बढ़ाने और वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।