By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 23, 2026
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को टाटा संस को ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किए जाने को सही ठहराते हुए कहा कि सार्वजनिक धन तक प्रत्यक्ष या परोक्ष पहुंच रखने वाली बड़ी एनबीएफसी और मुख्य निवेश कंपनियों (सीआईसी) के लिए केंद्रीय बैंक के साथ पंजीकृत होना जरूरी है। मल्होत्रा ने यहां एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में शिरकत करते हुए कहा कि टाटा संस जैसी बड़ी एनबीएफसी और सीआईसी समूह की कंपनियों के शीर्ष पर होती हैं और धन जुटाने के लिए समूह की कंपनियों के बहीखाते का इस्तेमाल करती हैं। इससे सार्वजनिक धन के लिए प्रणालीगत जोखिम पैदा होता है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि यदि कोई कंपनी आरबीआई की परिभाषा के तहत एनबीएफसी या सीआईसी की श्रेणी में आती है और उसकी सार्वजनिक धन तक प्रत्यक्ष या परोक्ष पहुंच है, तो उसे पंजीकरण कराना होगा। यदि वह ऊपरी स्तर की श्रेणी में आती है, तो उसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध भी होना होगा। पिछले महीने आरबीआई ने टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की एनबीएफसी पंजीकरण प्रमाणपत्र लौटाने की अर्जी खारिज कर दी थी।
इससे टाटा संस के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की संभावना बढ़ गई है। टाटा संस को सितंबर, 2022 में ऊपरी स्तर की एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया गया था। कंपनी ने मार्च, 2024 में पंजीकरण से बाहर होने के लिए आवेदन किया था और इस श्रेणी से बाहर निकलने की पात्रता हासिल करने के क्रम में अपना कर्ज भी चुका दिया था।
इस बीच, टाटा संस का निदेशक मंडल संभावित सूचीबद्धता से जुड़े कदम आगे बढ़ा चुका है। हालांकि, समूह के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद बढ़ने के बीच कंपनी ने अन्य विकल्पों पर भी विचार करने की बात कही है। इस बीच, मल्होत्रा ने यह बात दोहराई कि आरबीआई की प्राथमिकता मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को समर्थन देना है।
उन्होंने कहा कि सीमेंट और इस्पात की बिक्री, ऋण वृद्धि, कर संग्रह और वाहन बिक्री जैसे संकेतक अर्थव्यवस्था में मजबूत गतिविधियों को दर्शाते हैं। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के संतोषजनक दायरे के भीतर है, लेकिन खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों से जुड़े आपूर्ति पक्ष के दबाव चुनौती बने हुए हैं। उन्होंने चालू वर्ष के लिए औसत मुद्रास्फीति का अनुमान 5.1 प्रतिशत बताया।
डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य पर मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई किसी खास विनिमय दर का लक्ष्य नहीं रखता है। केंद्रीय बैंक का जोर किसी निश्चित स्तर का बचाव करने के बजाय विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित स्थितियां बनाए रखने और उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने पर है।