By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 21, 2026
(अजय मसंद और फिलेम दीपक सिंह) नागोया, 21 सितंबर भारत का एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने का इंतजार सोमवार को भी खत्म नहीं हो पाया लेकिन निशानेबाजी रेंज पर उसने कुछ पदक बटोरे जबकि मिश्रित मार्शल आर्ट्स (एमएमए) में देश का पहला पोडियम फिनिश इतिहास से ज्यादा दिल तोड़ने वाली कहानी बनकर रह गया। सुचिका तारियाल सुबह कराए गए वजन में सिंगापुर की हुई हून तेओ से सिर्फ 700 ग्राम अधिक वजन होने के कारण फाइनल में जगह बनाने से चूक गईं। सेमीफाइनल का यह मुकाबला बराबरी पर छूटा था लेकिन अधिक वजन होने के कारण भारतीय खिलाड़ी को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा जो एमएमए में भारत का पहला पदक है।
युवा खिलाड़ी हिमांशु ढिल्लों और रुद्रांक्ष पाटिल ने रोमांचक शूटआउट में संयम बनाए रखते हुए क्रमशः व्यक्तिगत रजत और कांस्य पदक जीते। इससे पहले उन्होंने किशोर खिलाड़ी पार्थ माने के साथ मिलकर टीम रजत पदक हासिल किया था। इन तीन पदकों के साथ भारत के निशानेबाजी में कुल पदकों की संख्या पांच हो गई है जिसमें चार रजत और एक कांस्य पदक शामिल है लेकिन वह फिर से स्वर्ण पदक से चूक गया क्योंकि चीन ने विश्व नंबर एक शेंग लिहाओ के शानदार प्रदर्शन के साथ एक बार फिर नया मानक स्थापित किया।
शेंग, चांगहोंग झांग और सिहान मा ने 1899 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीता और इस तरह से पिछले साल काहिरा में बनाए गए अपने ही विश्व रिकॉर्ड 1898.4 में सुधार किया। सुचिका ने महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में एमएमए में एशियाई खेलों की पहली पदक विजेता बनकर इतिहास रचा लेकिन जश्न मनाने के बजाय, वह उस पदक के गम में डूबी हुई थीं जो फाइनल में पहुंचने पर उन्हें मिल सकता था। हरियाणा के रोहतक जिले के किलोई गांव की रहने वाली 36 वर्षीय सुचिका का जीवन परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाने का एक अद्भुत उदाहरण है।
वह 2024 में जिउ-जित्सु की विश्व चैंपियन रह चुकी हैं, उन्होंने 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो में और 2022 के एशियाई खेलों में कुराश फाइटर के रूप में देश का प्रतिनिधित्व किया था। सोमवार को उन्होंने जी-जान से मुकाबला किया, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण उन्हें पदक से वंचित रहना पड़ा। शुक्र है कि पदक पक्का हो चुका था और खुद को संभालते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि यह पदक उनके लिए कितना मायने रखता है।
उन्होंने बाद में पीटीआई से कहा, ‘‘यह मेरे जीवन से भी बढ़कर है। मैं कभी नहीं भूलूंगी कि मैं जापान आई और अपने देश के लिए पदक जीता। अब मैं चैन से मर सकती हूं।’’ बैडमिंटन, हॉकी और टेबल टेनिस में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया।
कबड्डी टीमों ने भी जीत के साथ शुरुआत की। महिला हॉकी टीम ने इंडोनेशिया पर 17-1 से शानदार जीत हासिल की, जिससे उनके आत्मविश्वास का पता चलता है। अगर भारतीय टीम स्वर्ण पदक जीत लेती है तो उसे 2028 के ओलंपिक खेलों के लिए टिकट भी मिल सकता है।
बैडमिंटन में पुरुष टीम ने बांग्लादेश को 3-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया, जिसमें लक्ष्य सेन, के श्रीकांत और आयुष शेट्टी ने एकल मैचों में आसान जीत हासिल की। मुक्केबाजी में भी इसी तरह की आत्मविश्वासपूर्ण शुरुआत देखने को मिली, जिसमें सुमित कुंदू (70 किलोग्राम) ने आसानी से जीत हासिल की। भारत की महिला और पुरुष टेबल टेनिस टीमें भी अपने-अपने पाकिस्तानी प्रतिद्वंद्वियों पर 3-0 की समान जीत के बाद क्वार्टर फाइनल में पहुंच गईं।
महिला टीम ने एकतरफा मुकाबले में पाकिस्तान को 3-0 से हराकर लगातार तीसरी जीत के साथ ग्रुप एफ में शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि पुरुष टीम ने भी इसी अंतर से जीत दर्ज की। कबड्डी में गत चैंपियन भारतीय पुरुष टीम ने जापान को 49-24 से जबकि महिला टीम ने बांग्लादेश की चुनौती को 42-21 से ध्वस्त करते हुए जीत के साथ अपने अभियान का आगाज किया। हालांकि तैराकी में भारत को निराशा ही हाथ लगी।
एशियाई खेलों में 50 मीटर बैकस्ट्रोक के फाइनल में श्रीहरि नटराज 10वें स्थान पर रहे। दो बार के ओलंपियन नटराज ने फाइनल में 25.52 सेकंड का समय लेकर अंतिम स्थान हासिल किया, जो दिन में पहले हुई हीट में उनके 25.37 सेकंड के प्रयास से भी खराब था। सॉफ्ट टेनिस में भी निराशा हाथ लगी, जब आध्या तिवारी और जय मीना को मिश्रित युगल स्पर्धा में फिलीपींस के क्रिस्टी सनोसा और शेरविन रे नुगिट से कड़े मुकाबले में 2-5 से हार का सामना करना पड़ा।