By रेनू तिवारी | Jul 16, 2026
सिनेमा जगत में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिन्हें आप बस मनोरंजन के लिए देखते हैं, और कुछ ऐसी होती हैं जिनके लिए आपको बाकायदा तैयारी करनी पड़ती है। हॉलीवुड के दिग्गज डायरेक्टर क्रिस्टोफर नोलन की महा-महत्वाकांक्षी फिल्म 'द ओडिसी' (The Odyssey) इसी दूसरी कैटेगरी का हिस्सा है। कल भारतीय सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही इस फिल्म को लेकर दर्शकों में भारी क्रेज है। अगर आपने भी इस फिल्म की टिकट बुक कर ली है—खासकर IMAX 70mm स्क्रीनिंग की—तो इसे एक बेहद जरूरी चेतावनी समझें: थिएटर में आखिरी मिनट पर पहुँचने की गलती बिल्कुल न करें।
'ड्यून: पार्ट थ्री' (Dune 3) का प्रोलॉग देखने का मौका!
हॉलीवुड गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, 'द ओडिसी' की कुछ चुनिंदा IMAX स्क्रीनिंग्स पर मुख्य फिल्म शुरू होने से पहले एक बहुत बड़ा सरप्राइज़ दिया जा सकता है। चर्चा है कि दर्शकों को डेनिस विलेन्यूवे की आगामी फिल्म 'ड्यून: पार्ट थ्री' (Dune: Part Three) का 4 मिनट का एक्सक्लूसिव प्रोलॉग (शुरुआती हिस्सा) दिखाया जाएगा। हालांकि हर मार्केट के लिए इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस कयास ने ही सिनेप्रेमियों के बीच उत्सुकता को चरम पर पहुँचा दिया है। देर से पहुँचने वाले फैंस ट्रेलर से कहीं ज्यादा बड़ा सरप्राइज़ मिस कर सकते हैं।
नोलन का पुराना इतिहास रहा है गवाह
शुरुआती फुटेज से दर्शकों को चौंकाना क्रिस्टोफर नोलन के लिए नया नहीं है। इससे पहले साल 2007 में, उनकी फिल्म 'द डार्क नाइट' का शुरुआती हिस्सा 'आई एम लीजेंड' की कुछ IMAX स्क्रीन्स पर दिखाया गया था। इसके चार साल बाद, 'द डार्क नाइट राइज़ेज़' का 6 मिनट का प्रोलॉग 'मिशन: इम्पॉसिबल – घोस्ट प्रोटोकॉल' से पहले चलाया गया था, जिसने रिलीज से महीनों पहले टॉम हार्डी के 'बेन' वाले लुक की झलक देकर तहलका मचा दिया था।
क्या है 3,000 साल पुरानी 'द ओडिसी' की कहानी?
पूरी तरह से IMAX कैमरों से शूट की गई इस फिल्म को बेहतर ढंग से समझने के लिए इसकी पौराणिक पृष्ठभूमि जानना भी बेहद जरूरी है। मूल रूप से यह ग्रीक कवि होमर द्वारा रचित महाकाव्य है। कहानी इथाका के राजा ओडिसियस की है, जो ट्रोजन युद्ध जीतने के बाद अपने घर लौटने की लंबी यात्रा पर निकलते हैं। 10 साल लंबी इस यात्रा में समुद्र के क्रूर देवता, एक आंख वाले विशालकाय राक्षस (साइक्लोप्स), जादुई सायरन और भयानक आपदाएं उनका रास्ता रोकती हैं।
इस पौराणिक गाथा के मूल में इंसानी जज़्बात छिपे हैं—घर लौटने की तड़प, अपनों से मिलने की चाहत और विपरीत परिस्थितियों में ज़िंदा रहने का अटूट संकल्प। युद्ध का प्रसिद्ध लकड़ी का घोड़ा (ट्रोजन हॉर्स) और घर पर सालों तक पति का इंतजार करती उनकी पत्नी पेनेलोप, इस महाकाव्य के सबसे मजबूत स्तंभ हैं।
नोलन की फिल्म का स्वर्णिम नियम: 'पूरा ध्यान दें'
क्रिस्टोफर नोलन का सिनेमा कभी भी 'टाइमपास' के लिए नहीं होता। उनका विज़न दर्शकों से पूरे ध्यान, समर्पण और स्क्रीन पर मौजूद रहने की मांग करता है। फिल्म में दिखने वाली छोटी से छोटी बात या कोई मामूली सा लगने वाला विजुअल बाद में कहानी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
इसलिए, 'द ओडिसी' का टिकट ले चुके दर्शक समय से पहले घर से निकलें, फोन को साइलेंट मोड पर डालें और सिनेमा के इस भव्य उत्सव का हर एक सेकंड एन्जॉय करें। याद रखें, होमर के ओडिसियस ने तो घर का रास्ता खोजने में सालों बिता दिए थे, आपको तो बस अपने थिएटर पहुँचने के लिए 30 मिनट पहले निकलना है!