By रेनू तिवारी | Jul 17, 2026
मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी भारी तनाव के बीच इराक के एक बड़े हथियारबंद संगठन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और विवादित ऐलान किया है। खुद को 'इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक' (Islamic Resistance in Iraq) बताने वाले एक चरमपंथी संगठन ने दावा किया है कि उसने डोनाल्ड ट्रंप की हत्या करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 84 करोड़ रुपये से अधिक) के भारी-भरकम इनाम की घोषणा की है। यह धमकी संगठन से जुड़े आधिकारिक सोशल मीडिया और प्रोपेगैंडा चैनलों पर एक लिखित बयान के जरिए जारी की गई है। इस बयान में ट्रंप को 'अपराधी' बताते हुए उन पर ईरान और इराक के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की मौत का मुख्य जिम्मेदार होने का आरोप लगाया गया है।
बयान की शुरुआत इस्लामी प्रार्थना, "अल्लाह के नाम से, जो सबसे दयालु और मेहरबान है," और उसके बाद कुरान की एक आयत से होती है। इसमें कहा गया है, "और न्यायपूर्ण प्रतिशोध (क़िसास) में तुम्हारे लिए जीवन है, हे समझदार लोगों, ताकि तुम नेक बन सको।"
संगठन ने आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रशासन का "नैतिक पतन" ट्रंप द्वारा मारे गए कमांडरों - कासिम सुलेमानी और अबू महदी अल-मुहांदिस - की विरासत को लगातार निशाना बनाने में दिखता है; ये दोनों जनवरी 2020 में बगदाद में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए थे।
बयान के अनुसार, "अमेरिकी प्रशासन के नैतिक पतन का सबसे बड़ा सबूत यह है कि अपराधी ट्रंप, अपने अहंकार और आक्रामकता में, शहीद कमांडरों हाजी कासिम सुलेमानी और हाजी अबू महदी अल-मुहांदिस को लगातार निशाना बना रहे हैं। अल्लाह उनसे प्रसन्न हो। प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) ने इस अपवित्र कृत्य का सम्मान और गर्व के साथ जवाब दिया है और अपने अस्तित्व के दौरान ऐसा करना जारी रखेगा।"
संगठन ने 10 मिलियन डॉलर के इनाम का ऐलान किया
बयान में आगे कहा गया है कि 'इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक' ने डोनाल्ड ट्रंप पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम रखा है। इसमें कहा गया है, "इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक ऐलान करता है कि उसने अपराधी ट्रंप के सिर पर 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर का इनाम रखा है। जिसने भी इराकियों का खून बहाया, उन्हें विस्थापित किया, हमारे नेताओं को निशाना बनाया, हमारे बच्चों या हमारे विद्वानों को मारा, उसे दुनिया के आज़ाद लोग शांति से जीने नहीं देंगे।"
बयान का समापन अमेरिकी राष्ट्रपति को दी गई एक और चेतावनी के साथ होता है। इसमें लिखा है, "अपराधी ट्रंप को हमसे अपमान के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। हम शहीदों और मुजाहिदीन की कसम खाते हैं कि हम हमलावरों के तख्त हिला देंगे, जब तक कि ज़ुल्म के किले ढह न जाएं।"
इस टकराव में सुलेमानी और अल-मुहांदिस क्यों अहम बने हुए हैं?
जनवरी 2020 में बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास अमेरिकी ड्रोन हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कुद्स फोर्स के कमांडर, ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी और इराकी मिलिशिया लीडर अबू महदी अल-मुहांदिस की मौत के बाद अमेरिका, ईरान और पूरे मिडिल ईस्ट में ईरान समर्थित हथियारबंद समूहों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था।
तब से, इराक में काम कर रहे ईरान समर्थक कई मिलिशिया समूहों ने बार-बार अमेरिकी हितों और वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों को धमकियां दी हैं। वे अक्सर सुलेमानी और अल-मुहांदिस की मौत का हवाला देकर जवाबी कार्रवाई की बात करते हैं।
अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
फिलहाल, न तो व्हाइट हाउस और न ही अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इस ताजा बयान पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया दी है। इस दावे की सच्चाई और धमकी के पीछे की ऑपरेशनल क्षमता की पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारी आम तौर पर मौजूदा या पूर्व राष्ट्राध्यक्षों के खिलाफ सार्वजनिक धमकियों को गंभीरता से लेते हैं, और सुरक्षा एजेंसियां ऐसे बयानों पर कड़ी नज़र रखती हैं।