Australia में Data Centers के विस्तार पर नए नियमों की तैयारी, 2027 तक आ सकता है राष्ट्रीय कानून

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 18, 2026

(मैथ्यू बेनेटी, क्लाइमेटवर्क्स सेंटर) कैनबरा, 18 सितंबर (द कन्वरसेशन) ऑस्ट्रेलिया में डेटा सेंटर बहुत तेजी से स्थापित किए जा रहे हैं। गोदाम कंप्यूटर सर्वरों से भरे पड़े हैं। इन सर्वरों से लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) टूल्स चलाए जाते हैं।

वहीं सही तरीके से स्थापित डेटा सेंटर इसके ठीक विपरीत काम कर सकते हैं, जिनमें बिजली ग्रिड को स्थिर करना, क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना शामिल है। यह सोचना लुभावना लग सकता है कि भविष्य की प्रौद्योगिकियां इन समस्याओं को गायब कर सकती हैं—जैसे डेटा सेंटरों को पानी के अंदर या अंतरिक्ष में स्थापित करना। ये अंततः महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल इस मामले में छोटे पैमाने पर प्रयोग हुए हैं।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार वे नियम तैयार कर रही है जो एआई और डेटा सेंटरों को नियंत्रित करेंगे। ये नियम 2027 की शुरुआत में राष्ट्रीय कानून के रूप में पेश किए जा सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि डेटा सेंटरों का भविष्य कैसा दिखता है?

और इसे हकीकत बनाने के लिए उन नियमों में क्या शामिल करने की आवश्यकता है? ऊर्जा एक महत्वपूर्ण संसाधन है संघीय सरकार चाहती है कि नए डेटा सेंटर अपनी बिजली की मांग को नए नवीकरणीय (रिन्यूएबल) ऊर्जा उत्पादन के साथ जोड़ें, जिसे सेंसिबल फार्मिंग अरेंजमेंट्स का समर्थन प्राप्त हो। सेंसिबल फार्मिंग अरेंजमेंट्स का अर्थ है नवीकरणीय आपूर्ति कम होने पर भरोसेमंद बैकअप पावर।

अधिकांश राज्य और क्षेत्र इससे सहमत हैं। हालांकि, क्वींसलैंड और नॉर्दर्न टेरिटरी चाहते हैं कि डेटा सेंटरों को प्राथमिक आपूर्ति और बैकअप दोनों के लिए जीवाश्म ईंधन का उपयोग करने का लचीलापन मिले। लागत और जलवायु के दृष्टिकोण से, न तो संघीय और न ही राज्य/क्षेत्रीय सरकारों ने इसे पूरी तरह से सही पाया है।

गैस और डीजल का उपयोग, चाहे वह प्राथमिक हो या बैकअप आपूर्ति के रूप में, ऑस्ट्रेलिया के जलवायु उद्देश्यों और लागत कम रखने के सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है। यह स्थानीय वायु गुणवत्ता और सामुदायिक स्वास्थ्य के बारे में भी चिंताएं पैदा करता है। ऑस्ट्रेलिया ने 2050 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का संकल्प लिया है।

2035 तक हमारा अंतरिम लक्ष्य 62-70 प्रतिशत कटौती का है। सही निगरानी के बिना, डेटा सेंटर इस प्रतिबद्धता से समझौता कर सकते हैं। डेटा सेंटर परिष्कृत, अच्छे संसाधनों वाले ऑपरेटरों द्वारा बनाए जा रहे हैं।

वे जीवाश्म ईंधन पर निर्भर रहने के बजाय बैटरी और अन्य तकनीकों के साथ अपनी आपूर्ति को मजबूत करने में सक्षम हैं। यदि सही ढंग से संचालित किया जाए, तो डेटा सेंटर बिजली ग्रिड को बेहतर ढंग से काम करने में भी मदद कर सकते हैं। पानी का बुद्धिमानी से उपयोग जरूरी है।

उदाहरण के लिए, सिडनी वॉटर का अनुमान है कि सर्वर कूलिंग के लिए डेटा सेंटर की पानी की ज़रूरतें 2035 तक 250 मेगालीटर प्रतिदिन तक पहुंच सकती हैं। अच्छी खबर यह है कि ऐसी तकनीकें पहले से मौजूद हैं जो पानी के उपयोग को काफी कम कर सकती हैं। क्लोज्ड-लूप सिस्टम पानी को भाप बनकर उड़ने देने के बजाय रीसायकल करता है।

कुछ आधुनिक डेटा सेंटरों में प्राथमिक जल स्रोतों का बिल्कुल भी उपयोग नहीं होता। ‘नेशनल ऑस्ट्रेलियन बिल्ट एनवायरनमेंट रेटिंग सिस्टम’ डेटा सेंटरों के लिए अपनी ऊर्जा रेटिंग के साथ-साथ एक जल मानक भी विकसित कर रहा है। बिजली और पानी दोनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए, डेटा सेंटरों को दोनों पर शीर्ष छह-स्टार रेटिंग हासिल करने की आवश्यकता होगी।

डेटा सेंटरों की स्थापना में स्थान का बहुत महत्व है डेटा सेंटर कहां बनाए जाते हैं, इससे तय होता है कि वे स्थानीय संसाधनों पर कितना दबाव डालेंगे और आसपास रहने वाले लोगों को इससे कोई परेशानी तो नहीं होगी। ऑस्ट्रेलिया में लगभग 160 डेटा सेंटर पहले से ही काम कर रहे हैं। अधिकांश डेटा सेंटर मेलबर्न और सिडनी में केंद्रित हैं।

इससे स्थानीय पावर ग्रिड की क्षमता प्रभावित हो रही है, नेटवर्क योजना पर दबाव पड़ रहा है और संभावित रूप से उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ रही है। स्थानीय निवासियों के लाभ भी डेटा सेंटरों की स्थापना में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। स्थानीय निवासियों को भी डेटा सेंटरों से लाभ मिलना चाहिए।

इसके तहत शहरों और क्षेत्रों में, विश्वविद्यालयों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा सकता है ताकि श्रमिकों को बेहतर काम के अवसर मिल सकें। कुल मिलाकर देखें तो उपरोक्त उपाय डेटा सेंटर के एक अच्छे भविष्य का वर्णन करते हैं। इसकी तीन प्रमुख विशेषताएं हैं।

पहला, डेटा सेंटर ऑपरेटरों को मौजूदा उत्पादन पर निर्भर रहने के बजाय नवीकरणीय ऊर्जा की नयी आपूर्ति में निवेश करने की आवश्यकता है। दूसरा, ऊर्जा और पानी के लिए दक्षता मानक स्वैच्छिक के बजाय अनिवार्य होने चाहिए। और तीसरा, डेटा सेंटर कहां स्थित हों, इस निर्णय में शुरू से ही संसाधन उपयोग और सामुदायिक प्रभाव को आंका जाना चाहिए।

प्रमुख खबरें

Top 10 Breaking News 18 September 2026 | Election Commission decision on the TMC dispute | Nithari case prime accused Surendra Koli suicide | देश-विदेश से जुड़ी आज की मुख्य सुर्खियाँ यहां विस्तार से पढ़ें

BCCI AGM में Ajit Agarkar के भविष्य पर फैसला टला, पद पर संशय बरकरार

Houthis ने सऊदी को रॉकेट से दहलाया, इधर UAE प्रेसिडेंट ने मोदी को फोन मिलाया, जानें क्या कहा

TMC Election Symbol: ममता गुट को फुटबॉल खिलाड़ी और अरूप रॉय खेमे को मिला लिफाफा