By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 18, 2026
निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में छह अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नीत खेमे को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ जबकि अरूप रॉय गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। यह आदेश निर्वाचन आयोग द्वारा दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आया। तृणमूल के दोनों गुटों के बीच, पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर विवाद चल रहा है।
आयोग ने कहा था कि प्रस्तावित नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ से मिलता-जुलता हो सकता है और चुनाव चिह्न निर्दलीय उम्मीदवारों एवं पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए अधिसूचित खाली या उपलब्ध चुनाव चिह्नों की सूची में से चुना जाना चाहिए। पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम एवं मुर्शिदाबाद जिले के रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव छह अक्टूबर को होने हैं और मतगणना नौ अक्टूबर को होगी। निर्वाचन आयोग ने कहा था कि ‘चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968’ के पैरा 15 के तहत कार्यवाही पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था लेकिन उसने आगामी उपचुनावों के लिए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न की जरूरत को ध्यान में रखा।
आयोग ने कहा था कि यह अंतरिम व्यवस्था खास तौर पर आगामी उपचुनावों के लिए की गई है और यह तब तक लागू रहेगी जब तक कि ‘चुनाव चिह्न आदेश’ के पैरा 15 के तहत विवाद का अंतिम समाधान नहीं हो जाता। निर्वाचन आयोग ने बंगाल के रेजीनगर और नंदीग्राम तथा असम के नागांव में, जहां उसी दिन लोकसभा उपचुनाव होने हैं, निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे नामांकन की जांच और चुनाव चिह्न आवंटित करने के दौरान आयोग के आदेशों का सख्ती से पालन करें। आयोग ने कहा कि रेजीनगर से नामांकन दाखिल करने वाले सफीउज्ज्मान शेख और नंदीग्राम से नामांकन दाखिल करने वाले एहतेशमुल हक को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (जिसका चुनाव चिह्न लिफाफा है) का उम्मीदवार माना जाएगा।
उनके नामांकन पत्रों पर अरूप रॉय के हस्ताक्षर हैं। इसी तरह, रेजीनगर में रबीउल आलम चौधरी और नंदीग्राम में संचिता प्रधान (डे) को ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का उम्मीदवार माना जाएगा, जिसका चुनाव चिह्न फुटबॉल खिलाड़ी है। उनके नामांकन पत्रों पर ममता बनर्जी के हस्ताक्षर हैं।
निर्वाचन आयोग का यह आदेश मई में विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल में हुई बगावत के बाद आया है। जून में 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय पार्टी से निकाले गए नेता ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना और विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता हासिल कर ली, जो 28 साल के इतिहास में पहली बार पार्टी में विभाजन का संकेत था। इसके पांच दिन बाद यह बगावत संसद तक पहुंच गई।
वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 20 लोकसभा सदस्यों ने ‘नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) का दामन थामा और ‘‘अलग गुट के तौर पर’’ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को समर्थन दिया। इससे पार्टी के संसदीय खेमे में दरार और गहरी हो गई। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के लिए झटका है।
कांग्रेस से अलग होकर 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना होने के बाद से ही उनके द्वारा हाथ से बनाया गया चुनाव चिह्न पार्टी की पहचान का अहम हिस्सा रहा है। यह चुनाव चिह्न पिछले 28 वर्ष से पार्टी की पहचान रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीट पर जीत हासिल की थी और नंदीग्राम सीट छोड़ने का फैसला किया था जबकि आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर ने नाओदा और रेजीनगर दोनों सीट पर जीत हासिल करने के बाद रेजीनगर सीट छोड़ दी थी।
इसी कारण यह उपचुनाव हो रहा है।