By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 05, 2026
नयी दिल्ली, पांच सितंबर वाहन कलपुर्जा उद्योग की करीब 98,000 करोड़ रुपये पूंजी माल के भंडार में फंसी हुई है। माल भंडार के बेहतर प्रबंधन करने से इसमें से 29,000-39,000 करोड़ रुपये की पूंजी को मुक्त किया जा सकता है। वेक्टर कंसल्टिंग ग्रुप की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
यह अध्ययन उद्योग जगत के 21 वरिष्ठ अधिकारियों के बीच किया गया। इसके लिए आंकड़े जुलाई से अगस्त 2026 के बीच जुटाए गए। अध्ययन में यह भी अनुमान लगाया गया है कि भारत के वाहन कलपुर्जा क्षेत्र में एमएसएमई कंपनियों का कुल कारोबार करीब 2.4-2.9 लाख करोड़ रुपये है।
इस क्षेत्र में उत्पादकता में 30 प्रतिशत सुधार से सालाना 74,000-88,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कारोबार हासिल किया जा सकता है। भारतीय कलपुर्जा विनिर्माता संघ (एसीएमए) के 66वें वार्षिक सत्र में जारी वेक्टर के अध्ययन में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल 95 प्रतिशत उद्योग प्रमुखों का मानना है कि एमएसएमई भविष्य की वृद्धि के लिए जरूरी क्षमताओं में पर्याप्त तेजी से निवेश नहीं कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कारखाने औसतन 75-85 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रहे हैं, जबकि सर्वेक्षण में शामिल 91 प्रतिशत लोगों ने क्षमता को एक बड़ी चुनौती माना।
वेक्टर कंसल्टिंग ग्रुप के प्रबंध साझेदार रवींद्र पाटकी ने कहा, “मौका केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। भारतीय कंपनियों के पास पहले से मौजूद क्षमता के एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल उत्पादन के लिए नहीं हो रहा है।” उन्होंने कहा कि परिचालन में फंसी पूंजी को मुक्त करना, मौजूदा कारोबार की आर्थिक स्थिति में सुधार करना और फिर अतिरिक्त धन को क्षमताएं बढ़ाने में लगाना यह तय करेगा कि भारतीय आपूर्तिकर्ता भविष्य के वाहन उद्योग मूल्य शृंखला में किस तरह आगे बढ़ेंगे।