स्वच्छ व स्वस्थ वातावरण की उपलब्धता अब बना मानवाधिकार, संयुक्त राष्ट्र ने दी मान्यता

By अंकित सिंह | Oct 09, 2021

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने सुरक्षित, स्वच्छ, स्वस्थ और सतत पर्यावरण को मानवाधिकार के रूप में मान्यता दे दी है। औपचारिक रूप से जलवायु परिवर्तन और इसके विनाशकारी परिणामों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में यह महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। कुछ महत्वपूर्ण देश जिसमें अमेरिका और ब्रिटेन भी शामिल है कि आलोचना के बावजूद यह प्रस्ताव भारी बहुमत के साथ पारित किया गया। संयुक्त राष्ट्र का मानवाधिकार परिषद ने स्वच्छ पर्यावरण प्रस्ताव को पारित किया। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में मानव अधिकारों की निगरानी के लिए एक विशेषज्ञ की नियुक्ति करने वाले प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई। प्रस्ताव में देशों से पर्यावरण में सुधार करने की अपनी क्षमताओं को बढ़ाने की भी बात कही गई है।

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प्रस्ताव पर सबसे पहली बार 1990 में चर्चा की गई थी। जलवायु मुकदमे में शामिल वकीलों का मानना है कि उन्हें इससे पर्यावरण और मानवाधिकारों से जुड़े मामलों में तर्क देने में मदद मिल सकती है। मानवाधिकार और पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र में विशेष दूत डेविड बॉयड ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह दुनिया में जीवन बदलने वाला साबित हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वैश्विक पर्यावरणीय संकट के कारण हर साल 9 बिलियन से अधिक लोग समय से पहले ही मौत का शिकार हो जाते हैं। कोस्टा रिका, मालदीव, मोरक्को, स्लोवेनिया और स्विटजरलैंड द्वारा यह प्रस्ताव रखा गया था जो जिसे 43 मतों के साथ पारित किया गया। रूस ने आपत्ति दर्ज की जबकि चीन, इरीट्रिया, भारत और जापान अनुपस्थित रहे।

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ह्यूमन राइट्स वॉच में संयुक्त राष्ट्र एडवोकेसी (पक्षधरता) की उप निदेशक लूसी मैककर्नन ने वैश्विक पर्यावरण संकट से निपटने में मदद करने के लिए स्वच्छ पर्यावरण उपाय को महत्वपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर इस अधिकार को मान्यता देने से स्थानीय समुदायों को पर्यावरण विनाश के खिलाफ आजीविका, स्वास्थ्य और संस्कृति की रक्षा करने में मदद मिलेगी और सरकारों को यह मजबूत और बेहद सुसंसगत पर्यावरण संरक्षण कानूनों और नीतियों को बनाने में मदद करेगी। वहीं एक अन्य प्रस्ताव में ‘विशेष प्रतिवेदक’ का पद तीन साल के लिए सृजित किया गया है, जो अन्य चीजों के साथ इस बात की निगरानी करेगा कि जलवायु परिवर्तन कैसे मानवाधिकारों को प्रभावित करता है। इस प्रस्ताव के लिए 42-1 से मतदान हुआ। 

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