Prabhasakshi NewsRoom: Iran War का बड़ा असर, हवाई ईंधन के दाम आसमान पर, Commercial LPG की कीमत में भी भारी वृद्धि

By नीरज कुमार दुबे | Apr 01, 2026

ईरान युद्ध भले ही भारत से बहुत दूर हो रहा हो लेकिन उसका असर अब यहां सबकी जेब पर तेजी से पड़ने लगा है। हम आपको बता दें कि वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के कारण विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमत में आज भारी वृद्धि की गयी है इसके साथ ही व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत में भी एक बार फिर इजाफा कर दिया गया है। हम आपको याद दिला दें कि विमानन ईंधन की कीमतें दो दशक पहले नियंत्रण मुक्त कर दी गई थीं और तब से इन्हें अंतरराष्ट्रीय मानक कीमतों के अनुरूप तय किया जाता है। वैसे यह पहला मौका है जब एटीएफ की कीमत दो लाख रुपये प्रति किलोलीटर के स्तर को पार कर गई है।

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देखा जाये तो पश्चिम एशिया में भड़कती जंग, हार्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना और वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी उथल पुथल ने देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा वार किया है। केंद्र सरकार ने हालात की गंभीरता को देखते हुए हवाई ईंधन यानी एटीएफ की कीमतों में संभावित भारी बढ़ोतरी पर लगाम लगाने की कोशिश जरूर की है, लेकिन इसके बावजूद संकट की आंच अब हर क्षेत्र तक पहुंचती दिख रही है।

इस बीच, केंद्र सरकार ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते एटीएफ की कीमतों में एक अप्रैल को सौ प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती थी। लेकिन घरेलू यात्रियों को राहत देने के लिए इस बढ़ोतरी को केवल पच्चीस प्रतिशत तक सीमित रखा गया। यानी लगभग पंद्रह रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया। यह फैसला विमानन क्षेत्र के लिए किसी राहत से कम नहीं है, क्योंकि अगर पूरी बढ़ोतरी लागू होती तो हवाई किराए आसमान छू लेते और यात्रियों की जेब पर सीधा हमला होता।

दिल्ली में अब एटीएफ की कीमत एक लाख चार हजार नौ सौ सत्ताईस रुपये प्रति किलोलीटर पहुंच गई है, जो पिछले महीने के मुकाबले करीब 8.5 प्रतिशत ज्यादा है। देश के अन्य बड़े हवाई अड्डों पर भी इसी तरह की बढ़ोतरी देखी गई है। लेकिन असली झटका गैर-अनुसूचित और चार्टर उड़ानों को लगा है, जहां एटीएफ की कीमतें एक सौ पंद्रह प्रतिशत तक उछल गई हैं। यानी इस क्षेत्र के लिए यह सीधा आर्थिक संकट बन गया है।

उधर, रसोई गैस के मोर्चे पर भी हालात कम विस्फोटक नहीं हैं। 19 किलो वाले व्यावसायिक सिलेंडर की कीमतों में दो सौ रुपये तक की बढ़ोतरी ने होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। दिल्ली में अब यह सिलेंडर 2078 रुपये से ऊपर पहुंच चुका है, जबकि कोलकाता और चेन्नई में कीमतें और भी ज्यादा हैं। पांच किलो वाले छोटे सिलेंडर की कीमत भी 51 रुपये बढ़ा दी गई है।

हालांकि, सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत दी है। 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 913 रुपये पर स्थिर रखी गई है। लेकिन यह राहत कितने समय तक टिकेगी, यह बड़ा सवाल है। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अस्थिरता का असर कभी भी सीधे आम आदमी की रसोई तक पहुंच सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी भी स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल 94 रुपये 72 पैसे और डीजल 87 रुपये 62 पैसे प्रति लीटर पर टिका हुआ है। पिछले साल मार्च में दो रुपये की कटौती के बाद से इनकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे तो इस स्थिरता का टूटना तय है। यह पूरा घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा अभी भी वैश्विक संकटों के सामने कमजोर है। सरकार ने फिलहाल हालात संभालने की कोशिश जरूर की है, लेकिन असली चुनौती आगे है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर हवाई यात्रा से लेकर रसोई गैस और रोजमर्रा की जिंदगी तक हर जगह दिखेगा।

अब सवाल यह है कि क्या सरकार लंबी अवधि के लिए कोई ठोस रणनीति बनाएगी या फिर हर बार ऐसे संकटों के समय केवल अस्थायी राहत देकर हालात को संभालने की कोशिश करती रहेगी। क्योंकि ऊर्जा की कीमतों का यह तूफान अगर नहीं थमा, तो इसका असर केवल जेब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को हिला कर रख देगा।

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