By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 08, 2026
लखनऊ, आठ नवंबर उत्तर प्रदेश के अयोध्या में आयोजित भव्य दीपोत्सव पिछले 10 वर्षों में धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर भारतीय संस्कृति और रामायण की वैश्विक परंपराओं को साझा मंच देने वाले उत्सव के रूप में विकसित हुआ है। अयोध्या में सरयू तट पर शनिवार को आयोजित दसवें दीपोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के लोक कलाकारों, विदेशों की रामलीला मंडलियों और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं की भागीदारी ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। सरकार की ओर से रविवार को जारी एक बयान के मुताबिक, इस बार असम, जम्मू-कश्मीर, केरल, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के कलाकारों के साथ-साथ श्रीलंका, लाओस और दक्षिण अफ्रीका की रामलीला मंडलियों ने अपनी-अपनी सांस्कृतिक शैलियों में रामकथा प्रस्तुत की।
इन प्रस्तुतियों के जरिये विभिन्न देशों और भारतीय राज्यों की सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर प्रदर्शित किया गया। बयान के अनुसार, इस वर्ष दीपोत्सव में अयोध्या की 151 वर्ष पुरानी साहबगंज रामलीला को पहली बार मंच मिला। अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार आशुतोष द्विवेदी ने इसे अयोध्या की सबसे पुरानी रामलीला बताया है।
केंद्रीय रामलीला समिति के जिलाध्यक्ष मनोज जायसवाल के मुताबिक, इस रामलीला के मंचन का यह 151वां वर्ष है। स्थानीय रामलीलाओं की समीक्षा के बाद इसे दीपोत्सव में प्रस्तुति का अवसर दिया गया। बयान के मुताबिक, आयोजन में अर्जेंटीना और रूस के सेंट पीटर्सबर्ग के अलावा अमेरिका के शिकागो से आए पर्यटकों ने भी हिस्सा लिया।
अधिकारियों के अनुसार, शिकागो से आए पॉल और शेल्बी ने राम की पैड़ी पर स्थानीय लोगों के साथ दीप जलाए और सरयू आरती में भाग लिया। विदेशी आगंतुकों की भागीदारी को अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति बढ़ती अंतरराष्ट्रीय रुचि के रूप में देखा जा रहा है। दीपोत्सव के विस्तार के साथ अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय परंपराओं को भी प्रमुखता दी गई है।
बयान के अनुसार, सरयू तट पर दीप प्रज्ज्वलन, राम की पैड़ी पर सरयू आरती, रामकथा पार्क में प्रतीकात्मक रामराज्याभिषेक और रामायण के प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियां आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे। दीपोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभु श्रीराम के स्वरूप का स्वागत किया और राम रथ खींचा। बयान के अनुसार उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन की मौजूदगी में रामकथा पार्क में प्रतीकात्मक राज्याभिषेक समारोह आयोजित किया गया।
इस दौरान पारंपरिक प्रस्तुतियों के साथ प्रकाश व्यवस्था, प्रोजेक्शन और आधुनिक दृश्य तकनीकों का भी इस्तेमाल किया गया। बयान के मुताबिक, दीपोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने संतों को मिठाई और उपहार भेंट किए। संतों ने अयोध्या को देश-विदेश में पहचान दिलाने तथा धर्म और संस्कृति के संरक्षण के प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री की सराहना की।
अधिकारियों के अनुसार, दसवें दीपोत्सव में स्थानीय रामलीलाओं, भारतीय लोक कलाओं और विदेशी रामायण परंपराओं की भागीदारी ने अयोध्या को सांस्कृतिक संवाद के केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया।