Bahadur Shah I: सबसे अधिक उम्र में गद्दी पर बैठने वाले इस शासक को मिली थी शाहे बेखबर की उपाधि

By अनन्या मिश्रा | Feb 27, 2023

देश में मुगलों ने कई सालों तक शासन किया है। वहीं मुगलों का इतिहास शाही सत्ता और खूनी सियासत के लिए जाना जाता है। जहां पर रिश्तों में संवेदना नहीं बल्कि साजिशों की बू आती थी। मुगलकाल के राजनीतिक इतिहास में शासन के लिए भाई ही भाई के खून का प्यासा बना। ऐसा ही कुछ इतिहास रहा मुगल शासक बहादुर शाह प्रथम का। बता दें कि बहादुर शाह प्रथम मुगल सम्राट औरंगजेब का तीसरा पुत्र था। जिसका वास्तविक नाम कुतुब उद-दीन मुहम्मद मुअज्ज़म था। आज ही के दिन यानी की 27 फरवरी की मृत्यु हुई थी। 

बहादुर शाह प्रथम का जन्म भारत के बुरहानपुर में 14 अक्टूबर सन् 1643 को हुआ था। वह दिल्ली की गद्दी पर सातवें मुगल बादशाह के तौर पर काबिज हुआ था। बता दें कि वह 63 साल में उसने सत्ता संभाली थी। बहादुर शाह प्रथम को शहज़ादा मुअज्ज़म और शाहे बेखबर भी कहा जाता था। बहादुर शाह प्रथम भारत पर शासन करने वाला 8वां मुग़ल शासक था। वह औरंगजेब की मुस्लिम राजपूत पत्नी नवाब बाई के पुत्र थे। जिस दौरान बहादुर शाह प्रथम गद्दी पर बैठा उस समय उसकी आयु 63 वर्ष थी। ऐसे में वह 5 साल से ज्यादा शासन नहीं कर सका।

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वृद्ध मुग़ल शासक

बहादुर शाह को गद्दी पाने के लिए अपने ही भाई कामबख्श से युद्ध करना पड़ा था। अपनी जीत के बाद उन्होंने अपने समर्थकों को नई पदवियां तथा ऊचें दर्जे प्रदान किए। बहादुर शाह की गिनती सबसे गद्दी पर बैठने वाले सबसे वृद्ध शासक के रूप में होती है। अपनी उम्र के कारण वह अत्यन्त उदार, आलसी तथा उदासीन व्यक्ति था। इतिहासकारों का कहना है कि बहादुर शाह राजकीय कामों में काफी उदाशीन रहता था। जिसके चलते लोग उसे शाहे बेखबर कहने लगे थे। राजनीतिक गतिविधियों और साजिशों से अंजान बहादुर शाह का दरबार दो दलों बंट गया था। जिनमें से एक ईरानी दल और दूसरा तुरानी दल था।

बहादुर शाह प्रथम के बारे में कुछ रोचक तथ्य

- बहादुर शाह को शाहे बेखबर भी कहा जाता है। 

- बहादुर शाह एक मात्र ऐसा मुगल शाशक था जिसने सैय्यद की उपाधि का प्रयोग किया था।

- बहादुर शाह को महज 20 साल की आयु में दक्कन का गवर्नर बनाया गया था।

- शिवाजी और बहादुर के बीच हुए युद्ध में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। जिसके बाद शिवाजी ने उन्हें 8 साल कैद में रखा था।

- बहादुर शाह ने अपने पिता औरंगजेब को गद्दी से हटाने के लिए कई बार साजिश रची। लेकिन वह हर बार असफल हुए।

- बहादुर शाह ने धर्म के वास्तविक सम्मान के कारण 1695 में गुरु गोबिंद सिंह की सेना से लड़ने से इंकार कर दिया था। 

- सन् 1707 में पिता औरंगजेब की मृत्यु के बाद बहादुर शाह अंतिम सफल मुगल सम्राट बने।

- जोधपुर के अजीत सिंह और अंबर के मान सिंह के साथ बहादुर शाह ने शांति संधियों पर हस्ताक्षर किए थे।

- बता दें कि इस मुगल शासक के शासनकाल में सिखों और राजपूतों के साथ विवादों की एक श्रृंखला थी।

मृत्यु

बहादुर शाह की मृत्यु 27 फरवरी, 1712 को लाहौर में शालीमार बाग़ का पुनर्निमाण करवाते समय हुई थी। बहादुर शाह अपने अंतिम समय में प्लीहा वृद्धि से जूझ रहे थे। जिसके कारण दिन पर दिन उनका स्वास्थ्य गिरता चला गया। अंत में यही इनकी मौत का कारण बना। दिल्ली के महरौली में मोती मस्जिद में बहादुर शाह प्रथम को दफनाया गया था।

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