Hormonal Imbalance है Mood Swings की वजह? Diet और Fitness से ऐसे करें कंट्रोल

By दिव्यांशी भदौरिया | Jun 14, 2026

खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण कई बार शरीर में हार्मोनल बदलाव किए जाते हैं। जब हार्मोन में बदलाव होते हैं, तो व्यक्ति के मूड में बार-बार बदलाव, वजन बढ़ने और मनोदशा में काफी बदलाव देखने को मिलता है। हमारे शरीर में एंडोक्राइन सिस्टम हार्मोन को सर्कुलेट करता है, जो काफी कार्यों के लिए जरुरी होता है। शरीर हेल्दी बने रहे इसलिए बॉडी में कई हार्मोन्स सटीक मात्रा में लगातार बनते हैं।

असंतुलित हार्मोन को ठीक करने के नेचुरल उपाय

अपनी डाइट में प्रोटीन रिच फूड्स को एड करें

एनसीबीआई के अनुसार, प्रोटीन शरीर के लिए बेहद जरुरी पोषक तत्व है। प्रोटीन शरीर को जरुरी अमीनो एसिड को प्रदान करता है, जिसकी मदद से कई जरुरी हार्मोन्स बनते हैं। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त आहार लेने से ग्रोथ हार्मोन्स और टेस्टोस्टोरोन में बढ़ोतरी होती है। रिसर्च में बताया गया है कि अगर आप हर मील में 25 से 30 ग्राम प्रोटीन लेते हैं, तो यह आपके लिए काफी फायदेमंद होता है। इसलिए आप डाइट में अंडे, दालें, पनीर, दूध, दही, चिकन, सोया और टोफू का सेवन कर सकते हैं।

रोजाना एक्सरसाइज करें

हार्मोनल हेल्थ के लिए नियमित रुप से फिजिकल एक्टिविटी करना बेहद जरुरी है। NIH के अनुसार प्रतिदिन व्यायाम इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाने में मदद करता है और शरीर में ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित करने में सहायक होता है। एनसीबीआई के अनुसार, नियमित एक्सरसाइज करने में एंडोर्फिन और ग्रोथ हार्मोन एक्टिव रहता है। जिससे मूड और एनर्जी लेवल बेहतर होते हैं। इसलिए रोजाना तेज चलना, साइकलिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, योग आदि एक्सरसाइज करें।

वजन को नियंत्रित करता है

अगर आप बढ़ते हुए वजन से परेशान हैं, तो इसके पीछे का कारण हार्मोन असंतुलन होता है। एनसीबीआई के अनुसार, मोटापा इंसुलिन, लेप्टिन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन्स के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। जब शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होता है, तो सूजन बढ़ने की संभावना अधिक होती है और इससे हार्मोनल समस्याएं होने का खतरा और भी बढ़ जाता है। वजन कम करने के लिए प्रोसेस्ड फूड, बाहर का अनहेल्दी खाना, व्हाइट ब्रेड और चीनी वाले अन्य ड्रिंक्स लेने से बचें। इसके साथ ही फिजिकली रूप से एक्टिव रहना बेहद जरुरी है।

तनाव न लें

इंडियन जरनल ऑफ एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म के अनुसार, अत्यधिक तनाव शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है। तनाव की स्थिति में ग्लूकोकोर्टिकोइड्स, कैटेकोलामाइंस, ग्रोथ हार्मोन और प्रोलैक्टिन जैसे हार्मोनों के स्तर में बदलाव देखा जा सकता है। इनमें से कुछ बदलाव शरीर को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने में मदद करते हैं, लेकिन लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव ग्रेव्स रोग, प्रजनन संबंधी समस्याओं और बढ़ते वजन जैसी स्थितियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। 

इसलिए मानसिक तनाव को नियंत्रित रखना जरूरी है। इसके लिए नियमित योग और ध्यान का अभ्यास करें, अपने करीबी लोगों से खुलकर बातचीत करें, प्रकृति के बीच समय बिताएं और मनपसंद संगीत सुनकर खुद को रिलैक्स रखने की कोशिश करें।

शुगर का सेवन कम करें

यूनिवर्सिटी ऑफ उटाह के मुताबिक, अधिक मात्रा में शुगर या चीनी से बनीं चीजें खाने से एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर पर काफी प्रभाव पड़ता है। इससे महिलाएं में ओव्यूलेशन से जुड़ी  समस्याएं हो सकती हैं। इसके साथ ही यह मेंस्ट्रुअल साइकिल को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए रोजाना अपनी डाइट में शामिल होने वाली शुगर या उससे बनी चीजों का बाहर करें। ब्रेड, कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा का सेवन न करें। इसकी जगह पर आप फल, गुड़, नारियल पानी का सेवन कर सकते हैं। 

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