By नीरज कुमार दुबे | Aug 07, 2025
जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका अरुंधति रॉय की चर्चित पुस्तक "आज़ादी" सहित कुल 25 पुस्तकों पर प्रतिबंध लगाए जाने का आदेश जारी किया गया है। गृह विभाग द्वारा जारी इस आदेश के अनुसार, इन पुस्तकों को "भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा" बताते हुए जम्मू-कश्मीर में इनके स्वामित्व, बिक्री और प्रसार पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गई है। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 98 के अंतर्गत जारी किया गया है, जो प्रशासन को ऐसी सामग्री को "जब्त" (forfeited) घोषित करने और उनसे संबंधित परिसरों में तलाशी लेने का अधिकार देता है।
किन पुस्तकों पर लगी है रोक? यदि इसकी बात करें तो आपको बता दें कि अरुंधति रॉय की आजादी, तारिक अली और पंकज मिश्रा की Kashmir: The Case for Freedom, क्रिस्टोफर स्नेडन की Independent Kashmir, इमाम हसन अल-बन्ना (मुस्लिम ब्रदरहुड के संस्थापक) की Mujahid Ki Azan शामिल हैं। प्रशासन ने इन सभी पुस्तकों को "जब्त की गई सामग्री" घोषित करते हुए कहा है कि अब ये किसी भी व्यक्ति या संस्था की संपत्ति नहीं मानी जाएंगी और इन्हें रखने, बेचने या प्रचारित करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। देखा जाये तो यह कदम जहां सरकार की सुरक्षा नीति का हिस्सा है, वहीं कथित मानवाधिकार कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि इस प्रकार का साहित्यिक प्रतिबंध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है। उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर एक ऐसा क्षेत्र है जहां पिछले कई दशकों से राजनीतिक अस्थिरता, आतंकवाद और अलगाववाद का प्रभाव रहा है। ऐसे में वहां युवाओं को प्रभावित करने वाले साहित्य, मीडिया और ऑनलाइन सामग्री की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। इस संदर्भ में सरकार द्वारा यह कदम सुरक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक समझा गया।
बहरहाल, अरुंधति रॉय जैसी विवादित लेखिका की पुस्तक पर प्रतिबंध लगाना एक सही कदम है। अब यह देखने की बात होगी कि आने वाले दिनों में इस प्रतिबंध को कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर कैसे चुनौती दी जाती है?