रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर बांग्लादेश पीएम शेख हसीना का बड़ा बयान, देश के लिए बताया ‘बड़ा बोझ’

By रेनू तिवारी | Sep 04, 2022

समाचार एजेंसी एएनआई के साथ एक विशेष साक्षात्कार में बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना ने रोहिंग्या प्रवासियों के बारे में बात की। इस बातचीत में शेख हसीना ने रोहिंग्या प्रवासियों को देश पर "बड़ा बोझ" बताया हैं। इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संपर्क करते हुए उन्होंने कहा कि भारत इसे हल करने में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है। उसने यह भी स्वीकार किया कि बांग्लादेश में लाखों रोहिंग्याओं की मौजूदगी ने उनके शासन के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी थीं।

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मानवीय आधार पर हम रोहिंग्याओं को आश्रय देते हैं और सब कुछ प्रदान करते हैं। इस COVID के दौरान हमने सभी रोहिंग्या समुदाय का टीकाकरण किया। लेकिन वे यहां कब तक रहेंगे? इसलिए वे शिविर में रह रहे हैं। हमारे पर्यावरण को खतरा है। फिर कुछ लोग नशीले पदार्थों की तस्करी या कुछ हथियारों के टकराव, महिला तस्करी में लिप्त होते हैं। दिन-ब-दिन यह बढ़ता ही जा रहा है। इसलिए जितनी जल्दी वे स्वदेश लौटते हैं यह हमारे देश के लिए और म्यांमार के लिए भी अच्छा है। इसलिए हम उन्हें आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, हम उनके साथ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जैसे आसियान या यूएनओ, फिर अन्य देशों के साथ चर्चा कर रहे हैं।

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दिल्ली में अगले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की उनकी समकक्ष शेख हसीना के बीच मुलाकात के दौरान ‘इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट’ (आईसीपी) स्थापित करने पर बांग्लादेश की आपत्ति समेत त्रिपुरा से संबंधित अन्य मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। हसीना पांच सितंबर को भारत की चार दिवसीय यात्रा पर आ रही हैं। इस दौरान उनका ध्यान ‘बहुआयामी’ द्विपक्षीय गठजोड़ को मजबूत करने पर होगा। वह छह सितंबर को मोदी से मुलाकात करेंगी। विशेष सचिव (उद्योग एवं वाणिज्य) अभिषेक चंद्रा ने अगरतला में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “बांग्लादेश की आपत्ति के कारण दक्षिण त्रिपुरा के मुहरीघाट में आईसीपी का निर्माण नहीं हो सका। 

प्रधानमंत्री ने शेख हसीना के साथ बैठक में इस मुद्दे को उठाने पर सहमति जताई है।” आईसीपी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर प्रवेश और निकासी का एक बिंदु होता है, जहां आव्रजन और सीमा शुल्क संबंधित सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। चंद्रा ने कहा कि मोदी ने पिछले साल नौ मार्च को फेनी नदी पर ‘मैत्री सेतु’ का उद्घाटन किया था, ताकि बांग्लादेश स्थित चटगांव के साथ संपर्क स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि नदी के उस पार बांग्लादेश की तरफ भूमि सीमा शुल्क स्टेशन स्थापित नहीं हुआ है, जिसके कारण अभी तक व्यापार शुरू नहीं किया जा सका है। चंद्रा ने कहा, “हमें उम्मीद है कि दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच बैठक में मैत्री सेतु का उल्लेख किया जाएगा।

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