Bangladesh के राष्ट्रपति Mohammed Shahabuddin ने Muhammad Yunus का सारा कच्चा चिट्ठा खोल दिया

By नीरज कुमार दुबे | Feb 23, 2026

बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है क्योंकि देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शाहबुद्दीन ने पूर्व मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस पर गंभीर संवैधानिक चूक और सत्ता को अस्थिर करने के प्रयास का आरोप लगाया है। बांग्ला दैनिक कालेर कांथो को दिए गए साक्षात्कार में राष्ट्रपति ने जो कुछ कहा, उसने ढाका से लेकर पूरी दुनिया तक में हलचल मचा दी है। राष्ट्रपति का आरोप सीधा और तीखा है कि अंतरिम शासन काल के दौरान मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने संविधान की अनिवार्य व्यवस्थाओं की खुलेआम अवहेलना की। उन्होंने कहा कि जब भी मुख्य सलाहकार विदेश यात्रा से लौटते हैं तो उन्हें राष्ट्रपति से मिलकर यात्रा के परिणामों की लिखित जानकारी देनी होती है। लेकिन चौदह से पंद्रह विदेश यात्राओं के बावजूद एक बार भी ऐसी औपचारिकता नहीं निभाई गई। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें पूरी तरह अंधेरे में रखा गया।

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22 अक्तूबर 2024 की रात को उन्होंने भयावह बताया, जब बंगभवन के बाहर भीड़ ने प्रदर्शन किया और कथित रूप से राष्ट्रपति भवन को लूटने का प्रयास किया। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सेना की तैनाती करनी पड़ी। राष्ट्रपति का कहना है कि सशस्त्र बलों और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेताओं ने संवैधानिक निरंतरता का समर्थन किया। इसके अलावा, तीनों सेनाध्यक्षों ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं और उनकी हार पूरे सैन्य ढांचे की हार होगी। यह बयान दर्शाता है कि संकट की घड़ी में सेना ने राष्ट्रपति पद की गरिमा को बचाने का प्रयास लिया।

राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया कि उनके कार्यालय को सुनियोजित तरीके से अलग थलग किया गया। ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी के नव निर्वाचित नेताओं से उनकी शिष्टाचार भेंट के बाद बंगभवन के पूरे प्रेस प्रकोष्ठ को हटा दिया गया। प्रेस सचिव, उप प्रेस सचिव और सहायक प्रेस सचिव को एक साथ हटाया गया। दो वरिष्ठ फोटोग्राफर भी हटा दिए गए। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राष्ट्रपति कार्यालय साधारण प्रेस विज्ञप्ति तक जारी नहीं कर पा रहा था। यहां तक कि जब राष्ट्रीय क्रिकेट टीम अंतरराष्ट्रीय मैच जीतती थी, तब भी बधाई संदेश जारी करना संभव नहीं था।

राष्ट्रपति का आरोप है कि राष्ट्रीय दिवसों पर प्रकाशित सरकारी परिशिष्टों में उनकी तस्वीरें और संदेश हटा दिए गए। विदेश स्थित दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों से उनके चित्र तक उतार दिए गए। उन्होंने कहा कि यह कदम उन्हें हटाने की पहली चेतावनी था। उन्होंने इस संबंध में विदेश मंत्रालय को लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई।

देखा जाये तो बांग्लादेश की राजनीति अब नए मोड़ पर है। आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच असली सवाल यह है कि क्या देश का संवैधानिक ढांचा इस झटके से उबर पाएगा या सत्ता की यह जंग आगे और गहरी होगी। फिलहाल इतना तय है कि ढाका की सियासत में उठी यह आंधी जल्द थमने वाली नहीं है। अब देखना यह है कि मुहम्मद यूनुस के और कौन कौन से कारनामे सामने आते हैं।

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