By नीरज कुमार दुबे | May 27, 2026
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी की बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ आक्रामक मुहिम के नतीजे अब जमीन पर साफ दिखाई देने लगे हैं। सरकार के “पकड़ो, हटाओ, बाहर करो” अभियान के बाद उत्तर 24 परगना के बिथारी हाकिमपुर सीमा क्षेत्र में सैकड़ों बांग्लादेशी घुसपैठिये अपने देश वापस लौटने के लिए जमा हो गये हैं। वर्षों से भारत में अवैध तरीके से रह रहे इन लोगों में ऐसा भय बैठ गया है कि अब वे खुद ही सीमा पार कर भागने की कोशिश कर रहे हैं।
अब सच्चाई धीरे धीरे सामने आ रही है। जिन लोगों के पास भारत में रहने का कोई वैध दस्तावेज नहीं था, जिन लोगों ने खुद स्वीकार किया कि वे दलालों की मदद से सीमा पार कर भारत आये, उन्हीं के पास भारतीय मतदाता पहचान पत्र मिलना यह साबित करता है कि वर्षों तक घुसपैठियों को संरक्षण देकर वोट बैंक की राजनीति की गयी। लोकतंत्र बचाने का ढोंग करने वालों ने ही लोकतंत्र को भीतर से खोखला करने का काम किया। अवैध घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में जोड़कर चुनावी व्यवस्था को दूषित किया गया और देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया।
उधर, सीमा पर बने हालात बेहद गंभीर हैं। महिलाएं, बच्चे और पुरुष बड़ी संख्या में सीमा तक पहुंचे, जहां सीमा सुरक्षा बल ने उन्हें हिरासत में लेकर पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी। इसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से बांग्लादेश को सौंपा जायेगा। यह दृश्य साफ बता रहा है कि अब अवैध घुसपैठियों के दिन पूरे हो चुके हैं और सरकार किसी भी कीमत पर देश की सुरक्षा से समझौता करने वाली नहीं है।
मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी अवैध घुसपैठिये भारत में छिपकर रह रहे हैं, वे तुरंत देश छोड़ दें, वरना सरकार कठोर कार्रवाई करेगी। प्रशासनिक बैठकों में अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं कि अवैध बांग्लादेशियों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द वापस भेजा जाये। सरकार का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि अब अवैध घुसपैठ को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
उधर, सीमा पर लौट रहे कई बांग्लादेशियों ने स्वीकार किया कि वे वर्षों से निर्माण स्थलों, होटलों, मछली कारोबार और घरेलू कामों में लगे हुए थे। कई लोगों ने माना कि उनके पास भारतीय नागरिकता से जुड़ा कोई वैध दस्तावेज नहीं है। इसके बावजूद उनके पास मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेजों का मिलना यह संकेत देता है कि अवैध घुसपैठ को संगठित राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था।
हम आपको यह भी बता दें कि राज्य सरकार ने अवैध घुसपैठियों के लिए होल्डिंग सेंटर भी तेजी से तैयार करने शुरू कर दिये हैं। मालदा और मुर्शिदाबाद में ऐसे पहले दो केंद्र सक्रिय हो चुके हैं जहां पकड़े गये घुसपैठियों को रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि अब अवैध लोगों को जेलों में रखकर जनता के पैसे से भोजन, कपड़े और दवाइयां नहीं दी जायेंगी। देखा जाये तो यह कानून पहले भी मौजूद था, लेकिन राजनीतिक स्वार्थ के कारण उस पर अमल नहीं किया गया। अब देश और राज्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
सीमा सुरक्षा बल लगातार पूछताछ कर घुसपैठियों की पहचान कर रहा है। उनके अंगुलियों के निशान लिये जा रहे हैं, तस्वीरें खींची जा रही हैं और फिर बांग्लादेश सीमा रक्षक बल से संपर्क कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यह सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का निर्णायक अभियान बन चुका है।
हम आपको बता दें कि भारत और बांग्लादेश के बीच चार हजार किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा है, जो दुनिया की सबसे बड़ी जमीनी सीमाओं में गिनी जाती है। वर्षों से इस सीमा का फायदा उठाकर घुसपैठ, तस्करी और अवैध कारोबार चलाया जाता रहा है। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। असम समेत कई सीमावर्ती राज्यों में हजारों संदिग्ध विदेशियों की पहचान की जा चुकी है और लगातार कार्रवाई जारी है।
उधर, बांग्लादेश में भी इस कार्रवाई के बाद बेचैनी बढ़ गयी है। सीमा रक्षक बल ने कई इलाकों में गश्त तेज कर दी है और लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी जा रही है। बांग्लादेशी अधिकारियों को डर है कि बड़ी संख्या में अवैध लोगों की वापसी हो सकती है। इसलिए सीमा क्षेत्रों में लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है ताकि कोई अवैध घुसपैठ या जबरन प्रवेश की कोशिश न हो सके।
देखा जाये तो यह पूरा घटनाक्रम उन सभी अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए अंतिम चेतावनी है जो अब भी भारत में फर्जी पहचान और अवैध दस्तावेजों के सहारे छिपे बैठे हैं। उन्हें समझ लेना चाहिए कि अब बच निकलने का समय खत्म हो चुका है। सरकार, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुकी हैं। अब या तो वे खुद लौट जायें, वरना कानून उन्हें खोजकर बाहर करेगा।
हम आपको यह भी बता दें कि इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा, "बांग्लादेशी यहां क्यों रहेंगे? वे केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली हर सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। वे गरीबों कल्याण योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। उन्हें नागरिकता देकर, वोटर ID और आधार कार्ड देकर और उन्हें मतदाता बनाकर वोट लिया जाता था...ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी और उन्हें अलग किया जाएगा और गृह मंत्री पहले ही बोल चुके हैं कि उन सभी को वापस भेजा जाएगा।"