By अनन्या मिश्रा | Jun 26, 2026
आज ही के दिन यानी की 26 जून को वन्दे मातरम् गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी का जन्म हुआ था। वह एक प्रख्यात कवि, उपन्यासकार, गद्यकार और पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं। उनको भारत का एलेक्जेंडर ड्यूमा भी कहा जाता है। बंगला साहित्य को जनमानस तक पहुंचाने वाले वह पहले साहित्यकार माने जाते हैं। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर बंकिम चंद्र चटर्जी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
बंकिम चंद्र चटर्जी ने अपना पहला उपन्यास 'रायमोहन्स वाइफ' लिखा था। जोकि अंग्रेजी में था। फिर साल 1865 में उनकी पहली बांग्ला कृति दुर्गेशनंदिनी प्रकाशित हुई थी। इसके साथ ही उन्होंने 'विषवृक्ष', 'मृणालिनी', 'सीताराम', 'राजसिंह', 'कपालकुंडला', 'विज्ञान रहस्य', 'कृष्ण कांतेर विल', 'रजनी', 'कमला कांतेर दप्तर', 'लोकरहस्य', 'देवी चौधुरानी आईं' और 'धर्मतत्व' जैसी कई रचनाएं लिखीं।
सरकारी नौकरी के कारण बंकिम चंद्र चटर्जी किसी सार्वजनिक आंदोलन में हिस्सा नहीं ले पाते थे। जिसका उनको काफी मलाल रहता था। बाद में उन्होंने साहित्य के जरिए स्वतंत्रता आंदोलन के लिए जागृति का संकल्प लेकर इस पर काम करना शुरूकर दिया।
बंकिमचंद्र चटर्जी ने अपने उपन्यास आनंदमठ में राष्ट्रीय गीत वन्देमातरम् की रचना की थी। साल 1882 में यह उपन्यास प्रकाशित हुआ था। आनंदमठ में ईस्ट इंडिया कंपनी से वेतन के लिए लड़ने वाले भारतीय मुसलमानों और संन्यासी ब्राह्मण सेना का वर्णन किया गया। वंदे मातरम् इतना लोकप्रिय गीत था कि खुद गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने इसका संगीत तैयार किया था। दुनिया की कई भाषाओं में बंकिमचंद्र चटर्जी की रचनाओं के अनुवाद हुए। वहीं उनकी रचनाओं पर फिल्में भी बनी हैं।
वहीं 08 अप्रैल 1894 को बंकिम चंद्र चटर्जी का निधन हो गया था।