Barabanki-Bahraich Highway: 9000 पेड़ों पर अटकी Forest Clearance, NHAI और वन विभाग आमने-सामने

By Ankit Jaiswal | Apr 30, 2026

बाराबंकी से बहराइच के बीच प्रस्तावित छह लेन राष्ट्रीय राजमार्ग को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है, फिर भी काम शुरू होने से पहले जरूरी वन विभाग की अनुमति  का इंतजार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि प्रस्तावित मार्ग मुस्ताफाबाद से कैसरगंज होते हुए बहराइच तक जाएगा। वन विभाग का कहना है कि मौजूदा अलाइनमेंट में लगभग 9 हजार से अधिक पेड़ प्रभावित होंगे, जिन्हें काटना पड़ेगा। इसी वजह से विभाग मार्ग में बदलाव का सुझाव दे रहा है।

वहीं भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का तर्क है कि इस अलाइनमेंट को पहले ही उच्च स्तर से मंजूरी मिल चुकी है। अगर इसमें बदलाव किया जाता है तो सड़क शहर के अंदर से गुजरेगी, जिससे सैकड़ों मकानों को हटाना पड़ेगा और परियोजना की लागत में भारी बढ़ोतरी होगी।

बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 6,969 करोड़ रुपये है। इसमें से निर्माण कार्य पर लगभग 3,485 करोड़ रुपये और भूमि अधिग्रहण पर करीब 1,574 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह परियोजना हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत बनाई जाएगी, जिससे निजी और सरकारी साझेदारी के जरिए काम पूरा किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार वन क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की भरपाई के लिए दस गुना अधिक पौधारोपण का प्रस्ताव दिया गया है। साथ ही संबंधित भूमि के लिए मुआवजा भी दिया जाएगा। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कुल करीब 35 हजार पेड़-पौधे इस क्षेत्र में हैं, जिनमें लगभग 9,300 पेड़ बड़े आकार के हैं।

इस परियोजना का महत्व सिर्फ दो जिलों को जोड़ने तक सीमित नहीं है। यह मार्ग नेपाल सीमा से जुड़े व्यापार को भी बढ़ावा देगा। रूपईडीहा के रास्ते भारत-नेपाल के बीच व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा यह राजमार्ग पर्यटन के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। कतर्निया घाट, दुधवा और सोहेलवा जैसे वन पर्यटन स्थल, अयोध्या धाम, देवीपाटन धाम और श्रावस्ती जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। साथ ही लखनऊ से बहराइच की दूरी भी काफी कम होकर लगभग डेढ़ घंटे में तय हो सकेगी।

हालांकि, वन विभाग और राजमार्ग प्राधिकरण के बीच चल रही प्रक्रिया के कारण परियोजना की शुरुआत में देरी की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य स्तर पर फाइल लंबित है और केंद्र सरकार को स्थिति से अवगत कराया गया है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर वन अनुमति और भूमि अधिग्रहण में देरी जारी रहती है, तो क्या यह महत्वाकांक्षी परियोजना तय समय पर पूरी हो पाएगी या नहीं, यह आने वाले समय में ही साफ हो पाएगा।

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