Basava Jayanti 2026 | प्रधानमंत्री मोदी ने जगद्गुरु बसवेश्वर को श्रद्धांजलि दी, जातिवाद के खिलाफ शंखनाद करने वाले महापुरुष की गौरव गाथा

By रेनू तिवारी | Apr 20, 2026

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बसव जयंती के अवसर पर सोमवार को जगद्गुरु बसवेश्वर को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि न्यायपूर्ण समाज के उनके दृष्टिकोण और लोगों को सशक्त बनाने के उनके अटूट प्रयासों से हम सभी को हमेशा प्रेरणा मिलती रहेगी। मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘बसव जयंती के इस विशेष अवसर पर जगद्गुरु बसवेश्वर और उनके उपदेशों को नमन। एक न्यायपूर्ण समाज का उनका सपना और जनसशक्तीकरण के उनके अटूट प्रयास हमें सदैव प्रेरित करते रहेंगे।’’ बसवेश्वर, 12वीं शताब्दी के कवि-दार्शनिक और लिंगायत संप्रदाय के संस्थापक थे, उन्हें बसवन्ना के नाम से भी जाना जाता है।

बसव जयंती मनाने के पीछे के प्रमुख कारण और उनके विचार निम्नलिखित हैं:

जातिविहीन समाज की स्थापना

बसवन्ना ने उस समय के समाज में फैली जाति व्यवस्था, छुआछूत और ऊंच-नीच के भेदभाव का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने "मानव धर्म" को सर्वोपरि माना और सिखाया कि जन्म के आधार पर कोई बड़ा या छोटा नहीं होता।

2. 'अनुभव मंटप' (लोकतंत्र की नींव)

उन्होंने दुनिया की पहली लोकतांत्रिक संसद मानी जाने वाली 'अनुभव मंटप' की स्थापना की थी। यहाँ समाज के हर वर्ग (महिला, पुरुष, गरीब, अमीर) के लोग एक साथ बैठकर आध्यात्मिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करते थे।

3. 'कायका वे कैलास' (काम ही पूजा है)

बसवन्ना का सबसे प्रसिद्ध सिद्धांत था—"कायका वे कैलास"। इसका अर्थ है कि ईमानदारी से किया गया परिश्रम ही स्वर्ग के समान है। उन्होंने श्रम की गरिमा को बढ़ावा दिया और कहा कि हर व्यक्ति को मेहनत करके ही अपना जीविकोपार्जन करना चाहिए।

4. महिला सशक्तिकरण

12वीं सदी में उन्होंने महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देने की वकालत की। उन्होंने महिलाओं को शिक्षित होने और सामाजिक चर्चाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

5. 'वचन' साहित्य के जरिए शिक्षा

उन्होंने जटिल धार्मिक ग्रंथों के बजाय आम लोगों की भाषा (कन्नड़) में छोटे-छोटे 'वचन' लिखे, ताकि आम आदमी भी नैतिक और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर सके। 

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