By प्रज्ञा पांडेय | Apr 23, 2026
आज गंगा सप्तमी है, हिन्दू धर्म में गंगा सप्तमी बहुत पवित्र एवं खास मानी जाती है। वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है, गंगा सप्तमी को गंगा जयंती या गंगा पूजन के नाम से भी जाना जाता है तो आइए हम आपको गंगा सप्तमी व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ही मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में समाई थीं। इसलिए इस दिन को गंगा जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। गंगा और शिव का संबंध अटूट है, इसीलिए गंगा सप्तमी पर शिवलिंग का विशेष अभिषेक करने से साधक को न केवल शिव जी की, बल्कि मां गंगा की भी कृपा मिलती है। इस दिन पूजा के दौरान गंगा चालीसा का पाठ जरूर करें। इस बार 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी मनाई जाएगी।
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, देवी गंगा पहली बार गंगा दशहरा के दिन धरती पर उतरी थीं, लेकिन ऋषि जह्नु ने सारा गंगा जल पी लिया। तब सभी देवताओं और भागीरथ ने ऋषि जह्नु से गंगा को छोड़ने का अनुरोध किया। इसके बाद गंगा सप्तमी के दिन देवी गंगा फिर से धरती पर आईं और इसीलिए इस दिन को जह्नु सप्तमी भी कहा जाता है।
पुराणों में गंगा सप्तमी से जुड़ी एक अन्य कथा भी प्रचलित है, इस कथा के अनुसार एक बार, कोसल के राजा भागीरथ परेशान थे क्योंकि उनके पूर्वज बुरे कर्मों के पापों से पीड़ित थे। भागीरथ चाहते थे कि वे इससे मुक्त हों, इसलिए उन्होंने भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या की और भगवान ब्रह्मा ने उन्हें आश्वासन दिया कि गंगा पृथ्वी पर आएंगी, उनके पूर्वजों की आत्मा को शुद्ध करेंगी। लेकिन वह जानते थे कि देवी गंगा का प्रवाह सब कुछ नष्ट कर सकता है, तब ब्रह्मा जी ने भागीरथ को भगवान शिव की पूजा करने के लिए कहा क्योंकि वे ही गंगा के प्रवाह को नियंत्रित कर सकते हैं। इसलिए उन्होंने अपनी कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया। इस शुभ दिन देवी गंगा पृथ्वी पर उतरीं, इसलिए गंगा को भागीरथी के नाम से जाना जाता है।
पंडितों के अनुसार इस दिन चांदी या तांबे के लोटे में गंगाजल भरकर शिवलिंग पर अर्पित करें। ऐसा करने से साधक को मोक्ष और मानसिक शांति मिलती है। शिवलिंग पर गंगाजल में थोड़े काले तिल मिलाकर चढ़ाने से पितृ दोष शांत होता है और पुराने रोगों से मुक्ति मिलती है। इस दिन शिवलिंग पर 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हुए तीन दल वाला चिकना बिल्व पत्र चढ़ाएं। इससे कार्यक्षेत्र में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। महादेव को शमी बहुत प्रिय है। ऐसे में गंगा सप्तमी पर शमी चढ़ाने से शनि दोष के बुरे प्रभाव कम होते हैं। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर सफेद चंदन का लेप लगाएं। इससे आर्थिक तंगी दूर होती है और घर में समृद्धि आती है।
पंडितों के अनुसार गंगा सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करें। अगर गंगा स्नान न हो पाएं तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल में मिलाकर स्नान करें। इसके बाद मां गंगा की तस्वीर पर या गंगा नदी में फूल, सिंदूर, अक्षत, गुलाल,लाल फूल, लाल चंदन अर्पित कर दें। इसके बाद घी का दीपक जलाकर आरती करें और जीवन में सुख और शांति के लिए मां गंगा से प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान करने से इंसान को सभी पापों से मटकी मुक्ति हैं। पापों से मुक्ति मिलने के साथ रोगों से छुटकारा मिलता है और दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। सुबह स्नानादि के बाद साफ वस्त्र धारण करें। मंदिर या घर के शिवलिंग के सामने उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। सबसे पहले जल से, फिर पंचामृत से और अंत में शुद्ध गंगाजल की धार बनाते हुए महादेव का अभिषेक करें।
- ॐ नमः शिवाय॥
- गंगाधरय नमः तुभ्यं, संस्थितोऽसि जटाधरे। अर्घ्यं गृहाण देवेश, गंगापुत्र नमोऽस्तु ते॥
पंडितों के अनुसार गंगा सप्तमी पर पूजा के बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को जल, सत्तू और फल का दान करें। ऐसा करने से पूजा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। साथ ही शिव कृपा हमेशा के लिए प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा सप्तमी के दिन गंगा चालीसा का पाठ करने से जातक के जाने-अनजाने में हुए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही मां गंगा प्रसन्न होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। आइए पढ़ते हैं गंगा चालीसा।
हिन्दू पंचांग के अनुसार गंगा सप्तमी तिथि का आरंभ 22 अप्रैल को रात में 10 बजकर 50 मिनट पर होगा और 23 अप्रैल को रात में 8 बजकर 50 मिनट पर तिथि समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, सपत्मी तिथि 23 अप्रैल को रहने के कारण इसी दिन गंगा सपत्मी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन कई लोग व्रत और पूजा भी करते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। लेकिन, मां गंगा का वेग इतना तेज था कि अगर वह सीधे पृथ्वी पर आती तो काफी परेशानी हो सकती थी। तब मां गंगा के वेग को भगवान शिव ने अपनी जटाओं में समाहित कर लिया था। मान्यता है कि गंगा सप्तमी के दिन गंगा में स्नान करने से अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही पितरों की शांति और तर्पण के लिए भी यह दिन अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।
पंडितों के अनुसार इस दिन सुबह जल्दी उठे इसके बाद गंगा में स्नान करें। अगर गंगा में स्नान नहीं कर पा रहें हैं तो घर में ही पानी में थोड़ी गंगाजल मिलाकर आप स्नान कर सकते हैं। इसके बाद एक तांबे के लौचे में पानी लें और उसमें थोड़ा गंगा जल मिलाकर अर्घ्य दें। इसके बाद मंदिर में बैठकर मां गंगा के मंत्र ओम नमो गंगायै विश्वरुपिणी नारायणी नमो नम:का जप करें। इसके अलावा इस दिन जरुरतमंद लोगों को मौसमी फल या बाकी चीजों का दान जरुर करें। इस दिन दान करने से दोगुना फल प्राप्त होता है।
- प्रज्ञा पाण्डेय