Uttar Pradesh: इस वजह से उत्तर प्रदेश में अमित शाह को बनाया गया पर्यवेक्षक, 2024 पर भाजपा की नजर

By अंकित सिंह | Mar 15, 2022

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार जीत हासिल की है। उत्तर प्रदेश चुनाव के नतीजों में भाजपा अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ 273 सीट जीतने में कामयाब रही। उत्तर प्रदेश में अब सरकार गठन की कवायद भी तेज हो गई है। हालांकि मुख्यमंत्री को लेकर उत्तर प्रदेश में कोई लेकिन-किंतु नहीं है। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से योगी आदित्यनाथ ही भाजपा का नेतृत्व करेंगे। हालांकि भाजपा की ओर से उप मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों को लेकर मंत्रणा शुरू कर दी गई है। जातीय समीकरण को साधते हुए उत्तर प्रदेश में कैबिनेट का गठन बेहद महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में सरकार गठन की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दी गई है। अमित शाह के अलावा झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास भी उत्तर प्रदेश में सहपर्यवेक्षक के रुप में जाएंगे।

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उत्तर प्रदेश में 2017 में भाजपा ने 14 वर्षों का वनवास खत्म कर सत्ता में वापसी की थी। 2017 में अमित शाह ने उत्तर प्रदेश की कमान अपने हाथों में लिया था। 2022 में भी उत्तर प्रदेश में चुनावी रणनीति का मुख्य केंद्र अमित शाह ही थे। भाजपा ने इस बार के भी चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल की है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि 2024 के लिए सियासी जमीन तैयार करना भाजपा के लिए बेहद ही चुनौतीपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में जातीय समीकरण और क्षेत्रीय समीकरण भी मायने रखते हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए अमित शाह को उत्तर प्रदेश का पर्यवेक्षक बनाया गया है। अमित शाह जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को साधते हुए यूपी में भाजपा नेतृत्व के समक्ष 2024 के लिए भी टास्क रख सकते हैं।

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उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन के बावजूद भी भाजपा ने पश्चिमी क्षेत्र में एक बार फिर से बेहतर किया। अमित शाह ने पश्चिमी क्षेत्र के ही जिम्मेदारी अपने हाथों में ली थी। इसके अलावा अवध और बुंदेलखंड क्षेत्र में भी भाजपा का प्रदर्शन बेहद ही अच्छा रहा। जबकि काशी और गोरखपुर की सभी सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की। परंतु समाजवादी पार्टी भी मजबूत नजर आई। सवाल यह भी है कि क्या केशव प्रसाद मौर्य का कद उत्तर प्रदेश में घटेगा क्योंकि वह चुनाव हार गए हैं। जानकार मानते हैं कि फिलहाल ऐसा कुछ होता दिखाई नहीं दे रहा है। इस बार भी योगी सरकार में वह महत्वपूर्ण भूमिका में रहेंगे। यही कारण है कि अमित शाह खुद पर्यवेक्षक के तौर पर जा रहे हैं। 

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