By अनन्या मिश्रा | Jun 16, 2026
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी अपने हायर एकेडमिक लेवल और रिसर्च के लिए जाना जाता है। हर साल ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और डॉक्टरेट कोर्सस में एडमिशन लेने के लिए हजारों स्टूडेंट्स आवेदन करते हैं। अधिकतर कोर्सेज में एडमिशन CUET स्कोर के आधार पर होता है। वहीं JNU में एडमिशन के लिए केंद्र सरकार की आरक्षण नीति भी फॉलो की जाती है। जिसके तहत SC, ST, OBC-NCL, EWS और PwD कैटेगिरी के स्टूडेंट्स के लिए अलग-अलग सीटें आरक्षित होती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि JNU में एडमिशन कैसे मिलता है और किस वर्ग के छात्र को कितना आरक्षण मिलता है।
JNU ई-प्रोस्पेक्टस 2026-27 के मुताबिक जेएनयू में एडमिशन लेने के लिए केंद्र सरकार की आरक्षण नीति लागू होती है। जिसके तहत SC, ST, OBC और EWS कैटेगरी के स्टूडेंट्स के लिए विभिन्न कोर्सेज में सीटों का आरक्षण किया जाता है।
SC - 15%
ST - 7.5%
OBC-NCL - 27%
EWS - 10%
PwD - 5%
OBC-NCL कैंडिडेट्स को क्वालिफाइंग एग्जाम में 10% तक छूट मिलती है।
SC, ST और PwD कैंडिडेट्स न्यूनतम अंकों के साथ भी एंट्रेंस एग्जाम में बैठ सकते हैं।
कुछ कोर्स जैसे MTech और MBS के लिए अलग-अलग पात्रता नियम लागू होते हैं।
वहीं विदेशी स्टूडेंट्स को भी एडमिशन दिया जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय लेवल पर भी विविधता बनी रहे।
पूरी तरह से मेरिट के आधार एडमिशन होता है और सीमित सीटों पर चयन होता है।
चयनित स्टूडेंट्स को हॉस्टल सुविधा मिलती है, लेकिन यह उपलब्धता पर निर्भर करता है।
एक स्टूडेंट एक ही समय में सिर्फ एक ही फुल टाइम कोर्स में एडमिशन ले सकता है।
हालांकि NEP 2020 के ओपन और डिस्टेंस लर्निंग की अनुमति है।
बता दें कि इस यूनिवर्सिटी में रिजर्वेशन का फायदा लेने के लिए स्टूडेंट्स को सर्टिफिकेट जमा करना जरूरी होता है। आवेदन के दौरान अगर प्रमाण पत्र नहीं है, तो रसीद तो दी जा सकती है, लेकिन फाइनल एडमिशन से पहले डॉक्यूमेंट दिखाना जरूरी है। अगर कोई आरक्षित वर्ग का स्टूडेंट सामान्य मेरिट से सेलेक्ट होता है, तो उसको रिजर्वेशन की कैटेगिरी में नहीं गिना जाता है।