By डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा | Dec 03, 2025
आस्ट्रेलियाई थिंक टैंक लोवी संस्था द्वारा जारी एशिया पॉवर इंडेक्स 2025 में भारत का मेजर पॉवर का दर्जा हासिल करना इस मायने में महत्वपूर्ण हो जाता है कि भारत शक्तिशाली देशों की कतार में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे पायदान पर पहुंच गया है। लोवी द्वारा जारी इंडेक्स में मेजर पॉवर का दर्जा हासिल करने वाला भारत एक मात्र देश है जबकि सुपर पॉवर के रुप में अमेरिका और चीन अपना दबदबा बनाए रखने में कामयाब रहे हैं। हांलाकि भारत ने मेजर पॉवर का दर्जा हासिल कर लिया है पर सुपर पॉवर का दर्जा हासिल करने में अभी भारत को लंबा समय और कड़ी मेहनत व प्रयास करने होंगे। दरअसल 8 पेरामीटर्स में 100 में से 70 से अधिक अंक अर्जित करने वाले देश ही सुपर पॉवर की श्रेणी में आते हैं और अमेरिका इसमें 80.5 अंक प्राप्त कर सुपर पॉवर बना हुआ है वहीं चीन भी अमेरिका के पीछे पीछे 73.7 अंकों के साथ दूसरा सुपर पॉवर बना हुआ है। हांलाकि डोनाल्ड ट्रम्प के आने के बाद अमेरिका ने बहुत कुछ खोया है पर फिर भी पहला स्थान का ताज आने वाले सालों में भी छिनता हुआ नहीं लगता है। भारत ने अवश्य जापान को पछाड़ कर तीसरा स्थान बनाया है और 40 अंक प्राप्त कर मेजर पॉवर तो बन ही गया है। 40 या 40 से अधिक अंक प्राप्त करने वाले देश मेजर पॉवर की श्रेणी में आते हैं और यह दर्जा प्राप्त करने वाला भारत अकेला देश बन गया है। एशिया प्रशांत के 27 देशों से शेष 23 देश मिडिल पॉवर व उससे नीचे की श्रेणी में हैं। हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान इस इंडेक्स में पहले दस में भी स्थान नहीं बना पाया है। पाकिस्तान सूची में 16 वें स्थान पर रहा है। निश्चित रुप से यह भारत के लिए बड़ी उपलब्धी और इंटरनेशनल जगत में भारत के बढ़ते दबदबे का स्पष्ट संकेत है। ऑपरेशन सिन्दुर और इससे पहले भी जिस तरह से भारत ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया है और इंटरनेशनल डिप्लोमेसी में भारत की अग्रगामी भूमिका तय की गई है उसका बड़ा प्रभाव पड़ा है। आर्थिक क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों ने इसे तीसरे पायदान पर लाने में खासी भूमिका तय की है। भारत आज दुनिया के देशों में बड़ी आर्थिक शक्ति के रुप में उभरा है और दुनिया के देशों में सबसे अधिक यानी कि विदेशी निवेश में भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है।
ऑपरेशन सिन्दूर, आर्थिक क्षेत्र में बढ़ती साख, सैन्य क्षमता में बढ़ोतरी भारत की ताकत बन गई है। भारत के साथ सबसे बड़ी ताकत स्थिर और कड़े निर्णय लेने में भी सक्षम सरकार होना एक सकारात्मक पक्ष है तो दूसरी और जेन जेड और उसके बाद की जैनरेशन की बड़ी भूमिका हो गई है। आज तकनीकी रुप से भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत युवाओं का देश हो गया है। सैन्य क्षमता, कूटनीतिक प्रभाव, इकोनोमिक क्षमता और प्रौद्योगिकी, डिजिटलाइजेशन, कूटनीतिक और सांस्कृतिक रिलेशन आदि क्षेत्र में भारत ने पिछले साल की तुलना में अधिक अंक अर्जित किये हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत का वैश्विक स्तर पर आत्मविश्वास बढ़ा है और इसी का परिणाम है कि भारत आज आंख से आंख मिलाकर बात करने और आंतरिक व बाहरी निर्णय लेने में सक्षम और स्वतंत्र देश के रुप में उभरा है। हालांकि भारत के सामने अभी चुनौतियां भी बहुत है। सबसे बड़ी चुनौती जो विषय से अलग हटकर है वह है हमारे ही लोगों द्वारा विदेशी मीडिया व विदेशी धरती पर देश की छवि खराब करना है। होना यह चाहिए कि लाख राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विदेश की धरती पर एक रहना और एक रहने का संदेश देना जरुरी हो जाता है। रक्षा नेटवर्क को और अधिक विस्तारित करने की चुनौती के साथ ही कूटनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। अमेरिका की ट्रंप की देशी विदेशी नीति के कारण अमेरिका के अंकों में गिरावट दर्ज की गई है। देखा जाए तो भारत की सैन्य क्षमता के साथ साथ इकोनोमी के क्षेत्र में क्षमता का तेजी से विकास हुआ है। हांलाकि रक्षा नेटवर्क के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ किया जाना है।
एशिया पॉवर इंडेक्स 2025 में भारत का मेजर पॉवर बनना और तीसरा स्थान बनाना भारत की दुनिया के देषों में बढ़ती साख का परिचायक है। निश्चित रुप से यह बड़ी उपलब्धि है पर अब भारत को इसे बनाये रखने और अन्य पेरामीटर्स के क्षेत्र में भी योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ना है। चुनौतियां बहुत है पर चुनौतियों से पार पाते हुए ही कुछ अधिक अर्जित करना बड़ी बात हो जाती है। मेजर पॉवर से सुपर पॉवर बनना बड़ी चुनौती है पर सकारात्मक प्रयासों से सुपर पॉवर बनने के लक्ष्य के साथ ही भारत को आगे बढ़ना होगा।
- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा