By अभिनय आकाश | Nov 03, 2026
इजराइल के संसदीय चुनाव में भले ही नेतन्याहू के गठबंधन को बहुमत नहीं मिला हो और उनके फिर से प्रधानमंत्री बनने पर पेंच फंस गया हो लेकिन इसके बावजूद भी वो भारत की ताकत बढ़ाने वाले फैसले लेने में जुटे हुए हैं। अब उन्होंने भारतीय वायुसेना में बूस्टर डोज़ लगाने वाला ऐसा फैसला लिया है कि जिसने दुश्मनों को टेंशन में डाल दिया है। भारत और इजराइल की नई डील से पूरी दुनिया हैरान है। दरअसल आसमान की जंग में भारत अब ऐसा अचूक चक्रव्यूह रच रहा है जिसके सामने दुश्मन की हर चाल धरी की धरी रह जाएगी। आसमान में भारत की ताकत को कई गुना बढ़ाने वाली महाडल ने पीएम मोदी और नेतन्याहू की गहरी दोस्ती की एक और मिसाल पेश कर दी है। भारत और इजराइल की सरकारी रक्षा कंपनी इजराइल एयरस्पेस इंडस्ट्रीज यानी आईएआई के बीच लगभग ₹900 मिलियन यानी करीब ₹8000 करोड़ के रक्षा सौदे पर मोहर लगने वाली है। इस डील के तहत इजराइल एयरस्पेस इंडस्ट्रीज भारतीय वायुसेना को छह अत्याधुनिक एयर टू एयर रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट सप्लाई करेगी। इजराइल के पास हवा में ईंधन भरने वाले विमान तैयार करने का 40 साल से ज्यादा का तगड़ा अनुभव है। वो दुनिया के 12 से ज्यादा देशों के लिए ऐसे विमानों को कन्वर्ट कर चुका है।
डील के तहत टैंकरों के आने से भारतीय लड़ाकू विमानों को देश के भीतर बने एयरवेज से उड़ान भरकर सीधे दुश्मन के ठिकानों तक गहरी मार करने की ताकत मिलेगी। यह विशेष रूप से हिंद महासागर और दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में भारत की निगरानी और सुरक्षा को मजबूत करेगा। इसके अलावा युद्ध या आपातकाल जैसी स्थिति में विमानों को ईंधन लेने के लिए बार-बार जमीन पर उतरना और फिर से उड़ान भरना नहीं पड़ेगा। इससे ना सिर्फ समय बचेगा बल्कि विमानों का टर्न अराउंड टाइम यानी दोबारा मिशन पर जाने का समय भी काफी कम हो जाएगा। तो व नए रिफ्यूलिंग विमान खरीदने के मुकाबले पुराने बोइंग 767 यात्री विमानों को टैंकरों में बदलना काफी किफायती है। इससे भारत को कम बजट में विश्वस्तरीय तकनीक और क्षमता हासिल हो रही है। नई डील से मिड एयर रिफ्यूलिंग की कमी दूर होगी। फिलहाल भारतीय वायुसेना रूसी मूल के रिफ्यूलर्स का उपयोग कर रही है जो रखरखाव और सर्विसिंग की समस्याओं से जूझ रहे हैं।