By अभिनय आकाश | Oct 29, 2026
बेंगलुरु सिटी पुलिस ने बुधवार को कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को निशाना बनाने वाले कथित स्टिंग वीडियो की जांच में, प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि ये आरोप एक मनगढ़ंत और जानबूझकर रची गई कहानी का हिस्सा हैं। बेंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नर कार्यालय ने एक प्रेस नोट में बताया कि सिद्धारमैया के इस कथित स्टिंग वीडियो—जिसने मीडिया और आम जनता के बीच काफी चर्चा बटोरी है। उनके बनाए जाने, रिकॉर्ड किए जाने, इसे अपने पास रखने, आगे भेजने और प्रसारित करने के हर पहलू की व्यापक जांच की जा रही है। पुलिस ने कहा कि अब तक जुटाए गए सबूत प्रथम दृष्टया यह संकेत देते हैं कि वीडियो में दिखाए गए यौन शोषण के आरोप एक मनगढ़ंत और जानबूझकर रची गई कहानी का हिस्सा हैं। जांच के दौरान दर्ज किए गए बयान और इकट्ठा किए गए सबूत, वीडियो में दिखाई गई किसी भी घटना के सच होने की पुष्टि नहीं करते हैं।
पुलिस ने कहा, "तकनीकी जांच से पता चला है कि सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन का यह वीडियो सितंबर-अक्टूबर 2026 के दौरान यूट्यूब और एक्स सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया था। इसे गुमनाम अकाउंट्स के जरिए अपलोड किया गया, जिसमें डिजिटल पहचान छिपाने के लिए जटिल तरीकों का इस्तेमाल किया गया। जैसे वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN), मास्क किए गए IP एड्रेस, वर्चुअल और स्पूफ किए गए फोन नंबर, और अन्य तकनीकें। इसके डिजिटल निशान कर्नाटक के बाहर के स्थानों से जुड़े मिले हैं।" विस्तृत तकनीकी विश्लेषण के जरिए, जांचकर्ताओं ने उस मोबाइल फोन की पहचान की और उसे खोज निकाला, जिसका इस्तेमाल यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करने के लिए किया गया था। जांच के तार दिल्ली की एक ऐसी मोबाइल फोन दुकान तक पहुंचे, जो पुराने और रिफर्बिश्ड डिवाइस बेचने का काम करती है।