By दिव्यांशी भदौरिया | Sep 28, 2026
भाद्रपद की पूर्णिमा से पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है और इसका समापन अमावस्या के दिन होता है। पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों को तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान किए जाते हैं। अगर आप भी पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए तर्पण के साथ ही पिंडदान कराने की योजना बना रहे हैं, तो यह लेथ आपके लिए है।
कुरुक्षेत्र, हरियाणा
जैसा कि कुरुक्षेत्र को हमेशा महाभारत से जोड़कर देखा गया है, जबकि यहां ब्रह्म सरोवर, सन्निहित सरोवर और 48 कोस कुरुक्षेत्र में पिंडदान कराए जाने का भी बेहद ही खास महत्व माना जाता है।
कैसे पहुंचें?
यहां पर पहुंचने के लिए सबसे पहले आप कुरुक्षेत्र जंक्शन जाएं। इसके बाद ब्रह्म सरोवर, सन्निहित सरोवर और 48 कोस कुरुक्षेत्र का रास्ता महज, 3-4 किलोमीटर का ही रह जाता है, जिसके लिए बस, ऑटो-रिक्शा या गाड़ी लेना सबसे बेहतरीन ऑप्शन है।
काशी, उत्तर प्रदेश
हिंदू धर्म काशी यानी वारणसी को मोक्ष का द्वार कहा जाता है। इसी कारण से यह भोलेनाथ की इस नगरी में पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान कराया जाता है। यहां पर पिशाच मोचन कुंड स्थल इसके लिए खास है, जहां पिंडदान के साथ ही त्रिपिंडी श्राद्ध और पूर्वजों से संबंधित अन्य अनुष्ठान किए जाते हैं।
कैसे पहुंचें?
आप वाराणसी एयरपोर्ट या वाराणसी रेलवे स्टेशन तक पहुंचकर, वहां से अपनी सुविधा के अनुसार टैक्सी या ऑटो ले सकते हैं। वैसे यहां पर पिशाच मोचन कुंड की दूरी करीब 5 किलोमीटरर है।
हरिद्वार, उत्तराखंड
उत्तराखंड में हरिद्वार एक ऐसा स्थान है, जहां पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए अनुष्ठान किए जाते हैं। आपको बता दें कि, हरिद्वार में गंगा के किनारे जो नारायणी शिला मंदिर है, वहां आप पिंडदान कर सकते हैं।
कैसे पहुंचें?
अगर आप हरिद्वार में पिंडदान करने का सोच रहे हैं, तो इसके लिए आपको हरिद्वार रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक पड़ता है। रेलवे से यह मार्ग देश के कई बड़े शहरों के सड़क मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, फ्लाइट से आने के लिए आपको देहरादून जा सकते हैं।
उज्जैन, मध्य प्रदेश
महाकाल की नगरी उज्जैन पितृकर्म के लिए बेहद खास मानी जाती है। यहां पर सिद्धवट, गयाकोठा मंदिर, राम घाट औऱ नृसिंह घाट पितरों की शांति के लिए पूजा व पिंडदान किए जाते हैं।
कैसे पहुंचें?
अगर आप ट्रेन जाना चाहते हैं, तो सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन उज्जैन है। वहीं, आप फ्लाइट से जाना चाहते है, तो इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट तक आना होगा। यह उज्जैन से करीब 53 किलोमीटर की दूरी पर है। वहीं, सड़क मार्ग से भी उज्जैन जा सकते हैं।