By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 09, 2026
चंडीगढ़, नौ सितंबर पंजाब में एक ग्रामीण की कथित आत्महत्या के बाद उठे राजनीतिक तूफान के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लाशों पर राजनीति न करने की नसीहत दी। मान की यह टिप्पणी मादक पदार्थ की समस्या पर वित्त मंत्री हरपाल चीमा से सवाल करने वाले एक ग्रामीण की कथित आत्महत्या को लेकर राहुल द्वारा आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर निशाना साधने के बाद आई है। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में मान ने कहा कि पुलिस मामले में आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार के तहत एक ‘‘खतरनाक प्रवृत्ति’’ पैदा हो रही है कि यदि कोई सरकार की नाकामियों पर सवाल उठाता है, तो उसे जवाब के तौर पर धमकी और प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। इन आरोपों की प्रतिक्रिया में मान ने कहा, ‘‘राहुल गांधी जी, लाशों पर राजनीति ना करो, पंजाबियों को इस तरह की राजनीति पसंद नहीं है।’’ मुख्यमंत्री ने एक वीडियो साझा करते हुए कहा, ‘‘ये देखिए कांग्रेस के नेता जब पीड़ित के गांव जाकर यही गंदी राजनीति करने का प्रयास कर रहे थे, तो लोगों ने उन्हें वहां से भगा दिया।’’ मान ने सिंह की कथित आत्महत्या पर कहा कि पुलिस सभी आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘पंजाब में नशा फैलाने की जिम्मेदार अकाली (शिरोमणि आकाली दल)-भाजपा (भारतीय जनता पार्टी)और कांग्रेस की सरकारें रही हैं।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मेरी सरकार में किसी भी मादक पदार्थ तस्कर को बख्शा नहीं जाएगा।’’ सोशल मीडिया पर गुलजार के आखिरी पलों का एक कथित वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है जिसमें दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करने वाले सिंह राज्य के वित्त मंत्री से अपने इलाके में नशीले पदार्थों की उपलब्धता को लेकर सवाल करते नजर आ रहे हैं।
वह यह भी कहते सुने जा सकते हैं कि उनकी मौत के लिए सरपंच जिम्मेदार होगा और यह स्वीकार करते हैं कि उनका बेटा भी नशे का सेवन करता था। भावुक कर देने वाला यह वीडियो वायरल होने के बाद शिरोमणि अकाली दल (शिअद) समेत विपक्षी दलों ने भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार को घेरते हुए मामले की जांच की मांग की। इसका असर दिल्ली की राजनीति में भी देखने को मिला, जहां भाजपा और कांग्रेस ने भगवंत मान और हरपाल चीमा के इस्तीफे की मांग की।
दोनों दलों ने आरोप लगाया कि सिंह को आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया। राज्य में आने वाले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य सरकार पर संगरूर के ही एक अन्य ग्रामीण को कथित तौर पर हिरासत में प्रताड़ित करने के आरोपों को लेकर भी हमला बोला जा रहा है।
आरोप है कि मादक पदार्थों के दुरुपयोग के मुद्दे पर ‘आप’ सरकार के खिलाफ काले झंडे लहराने और नारे लगाने के कारण उसे हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया गया। गुलजार सिंह के परिवार की शिकायत के बाद भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत पांच लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। पंजाब पुलिस ने घटना की जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।