मोहन भागवत और अमित शाह ने राममंदिर को लेकर आगे की रणनीति बनाई

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 22, 2018

अहमदाबाद। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और हिंदू संतों ने शुक्रवार को अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल पर मंदिर निर्माण को लेकर आगे के रास्तों पर चर्चा की। यह जानकारी बैठक में हिस्सा लेने वाले धार्मिक नेताओं ने दी। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद से 210 किलोमीटर दूर राजकोट में दो दिवसीय हिंदू आचार्य सभा बैठक में मौजूद भागवत और संतों ने स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त किया कि मंदिर का निर्माण मई 2019 से पहले शुरू हो जाना चाहिए जब नरेंद्र मोदी सरकार का कार्यकाल समाप्त होगा।

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उच्चतम न्यायालय द्वारा बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि मालिकाना हक विवाद पर जनवरी में सुनवायी किये जाने की उम्मीद है। यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा को मंदिर का निर्माण 2019 से पहले शुरू करने का एक अल्टीमेटम दिया गया, सतगिरि ने ना में जवाब दिया। सतगिरि ने कहा, ‘‘मोहनजी ने अपनी इच्छा व्यक्त की कि राममंदिर का निर्माण 2019 चुनाव से पहले शुरू होना चाहिए लेकिन कोई अल्टीमेटम नहीं दिया गया।’’ 

एक अन्य संत ने कहा कि शाह ने बैठक में विधिक मामले की जानकारी साझा की और उच्चतम न्यायालय द्वारा मामले की सुनवायी जनवरी में लिये जाने की संभावना के बारे में बात की। संत ने कहा, ‘‘शाह ने हमें भरोसा दिया कि मंदिर का निर्माण उसी स्थल (अयोध्या में वहीं जो कि विवादों में है) पर होगा।’’ 

एक तीसरे संत ने धैर्य रखने की बात की और कहा, ‘‘वे (आरएसएस और भाजपा) जो भी जरूरी है करेंगे (मंदिर निर्माण के लिए)।’’ आरएसएस प्रवक्ता विजय ठाकुर ने कहा कि हिंदू आचार्य सभा का आयोजन प्रत्येक दो वर्ष पर होता है जिसमें हिंदू समाज से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षणिक मुद्दों पर चर्चा होती है। हिंदू सभा में भागवत और शाह के अलावा राम माधव और सुब्रमण्यम स्वामी जैसे नेताओं ने भी हिस्सा लिया।

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स्वामी ने कहा कि दलीलें हिंदुओं के पक्ष में हैं कि उन्हें राममंदिर के लिए जमीन मिल जाएगी लेकिन सवाल यह है कि उच्चतम न्यायालय मामले की सुनवायी कब करेगा। उन्होंने कहा, ''(पूर्व प्रधानमंत्री) नरसिंह राव ने कहा था कि यदि यह साबित हो जाता है कि उसी स्थान पर एक मंदिर था तो हम जमीन हिंदुओं को दे देंगे, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने भी यह साबित किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने भी फैसला दिया है कि नमाज के लिए मस्जिद जरूरी हिस्सा नहीं है जो कि कहीं भी की जा सकती है। सभी चीजें और दलीलें हमारे पक्ष में हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अब देखना है कि सुनवायी कब होती है और फैसला कब आता है।’’ 

बैठक राजकोट में अर्ष विद्या मंदिर में हुई जिसमें करीब 100 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। आरएसएस सहित हिंदुत्व संगठनों ने पिछले कुछ महीनों में मंदिर निर्माण जल्द करने को लेकर अपनी मांग तेज कर दी है और भागवत सहित कई इसके लिए कानून बनाने पर जोर दे रहे हैं।

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