Jan Gan Man: Bharat Bhushan Tiwari Encounter के बाद उठ रहे इन सवालों का क्या कोई जवाब है Bihar Govt. के पास?

By नीरज कुमार दुबे | Jun 23, 2026

क्या बिहार के भोजपुर में भारत भूषण तिवारी की मौत सचमुच पुलिस मुठभेड़ थी, या फिर आत्मसमर्पण के बाद उसे मारा गया? यही सवाल इस समय पूरे बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है। 28 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता भारत भूषण तिवारी की मौत ने राजनीति से लेकर आम लोगों तक को झकझोर दिया है। घटना के बाद सामने आए एक वीडियो ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बढ़ते विवाद और विपक्ष के हमलों के बीच बिहार सरकार ने अब मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या निष्पक्ष जांच संभव हो पायेगी? सवाल उठ रहा है कि अगर पुलिसकर्मी दोषी पाये गये तो क्या उन्हें भी सख्त से सख्त सजा संभव हो पायेगी? सवाल उठ रहा है कि पुलिस भारत भूषण तिवारी की जिस बंदूक को अवैध हथियार बता रही है उस अवैध हथियार के सप्लायर को क्या कोई सजा हो पायेगी? सवाल उठ रहा है कि बिहार में निर्माणाधीन पुलों के गिरने के दोषियों, भ्रष्टाचारियों और अपराधियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई क्यों नहीं होती? सवाल उठ रहा है कि क्यों सिर्फ सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने वाले भारत भूषण तिवारी का एनकाउंटर हो गया?

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विवाद तब और बढ़ गया जब घटना से ठीक पहले का एक सीधा प्रसारण वाला वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो में भारत भूषण तिवारी खुले मैदान में कैमरे से बात करता दिखाई देता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह अपनी पिस्तौल पुलिस की दिशा में फेंकता नजर आता है। इसके बाद गोली चलने की आवाज सुनाई देती है। अब सवाल उठ रहा है कि यदि उसने हथियार फेंक दिया था, तो फिर उसे गोली क्यों मारी गई? 

तिवारी के परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने आत्मसमर्पण के बाद भी उसे नहीं बख्शा। उनका कहना है कि यह मुठभेड़ नहीं बल्कि एकतरफा कार्रवाई थी। दूसरी ओर पुलिस लगातार यह कह रही है कि वह मानसिक रूप से अस्थिर था और अधिकारियों को धमकियां दे रहा था। हम आपको यह भी बता दें कि भोजपुर पुलिस ने घटना से एक दिन पहले बयान जारी कर कहा था कि तिवारी को निःशस्त्र कर मानसिक स्वास्थ्य केंद्र भेजने की तैयारी चल रही थी। यदि ऐसा था, तो फिर हालात इतने बिगड़े कैसे कि गोली चलाने की नौबत आ गई?

उधर, इस घटना ने राजनीतिक तूफान भी खड़ा कर दिया है। विपक्षी दल लगातार सरकार पर हमलावर हैं। विपक्ष का कहना है कि बिहार में कानून व्यवस्था के नाम पर फर्जी मुठभेड़ों को बढ़ावा दिया जा रहा है और सरकार जवाबदेही से बच रही है। इस बीच, जनदबाव बढ़ने के बाद बिहार सरकार ने न्यायिक जांच की घोषणा की है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विधि व्यवस्था सुधांशु कुमार ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और शाहाबाद क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक को जांच की निगरानी सौंपी गई है। साथ ही सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में अलग जांच समिति गठित की गई है। लेकिन फिर भी सवाल उठ रहा है कि क्या यह जांच निष्पक्ष होगी? 

हम आपको बता दें कि राज्य सरकार ने संबंधित थाने के प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया है। हालांकि विपक्ष इसे केवल दबाव कम करने की कोशिश बता रहा है। इस बीच, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कहा है कि बिहार सरकार अपराधियों के सामने नहीं झुकेगी और अपराध के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। फिलहाल पूरे बिहार की नजर इस न्यायिक जांच पर टिकी हुई है क्योंकि यह मामला केवल एक मुठभेड़ तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस कार्रवाई, मानवाधिकार और कानून व्यवस्था को लेकर व्यापक बहस का विषय बन चुका है।

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