By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 03, 2026
रायपुर, दो नवंबर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को कहा कि उनके नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने 2023 में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर ‘महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप’ घोटाले के कथित सरगना सौरभ चंद्राकर के खिलाफ ‘लुकआउट सर्कुलर’ जारी करने का आग्रह किया था। चंद्राकर ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। बघेल ने रायपुर के स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर पत्रकारों से कहा कि उनकी सरकार ने 2022 में इस कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी घोटाले के संबंध में 72 प्राथमिकी दर्ज की थीं।
ईडी को। और इसे किसने जारी किया? भाजपा कार्यालय ने (2023 में)।
उस वीडियो में शुभम सोनी दावा करता है कि वह महादेव सट्टेबाजी ऐप का मालिक है और ये लोग उसके कर्मचारी हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अब केंद्रीय एजेंसियां कह रही हैं कि चंद्राकर इस ऐप का प्रवर्तक है और इसी आधार पर ईडी उसके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। वहीं, शुभम सोनी का कहना है कि चंद्राकर उसका कर्मचारी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को स्पष्ट करना चाहिए कि असली मालिक कौन है—शुभम सोनी या सौरभ चंद्राकर।’’ सीबीआई की एक टीम ओमान गई थी, जो रविवार को चंद्राकर को भारत लेकर लौटी।
केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, चंद्राकर सीबीआई के दो मामलों और ईडी के एक मामले में वांछित था, जिनमें पहले ही आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। चंद्राकर के खिलाफ जारी ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसका पता लगाया और उसे हिरासत में लिया। इसके बाद सीबीआई और ईडी ने चंद्राकर के खिलाफ जुटाए गए सबूतों के साथ ओमान सरकार को उसके प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक अनुरोध भेजा।
सीबीआई के अनुसार, जांच में पता चला कि ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ देश में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी चलाने वाले सबसे बड़े गिरोहों में से एक था। आरोप है कि इसे भारत के बाहर से फ्रेंचाइजी के तहत संचालित विभिन्न केंद्रों और शाखाओं के नेटवर्क के जरिए चलाया जा रहा था। इस ऑनलाइन मंच के जरिए कथित तौर पर क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेलों और अन्य आयोजनों पर सट्टा लगाया जाता था।
देशभर में फैले इसके नेटवर्क के जरिए लोगों को सट्टेबाजी से जोड़ा जाता था और उनसे दांव पर लगाई गई रकम वसूली जाती थी। अवैध सट्टेबाजी से हुई कमाई को कथित तौर पर कई म्यूल बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता थ। इसके बाद कई खातों के बीच लेन-देन के जरिए रकम के स्रोत को छिपाकर उसे हवाला के माध्यम से विदेश भेज दिया जाता था।
एजेंसी का दावा है कि इस कमाई का एक हिस्सा गिरोह का कामकाज बिना किसी बाधा के जारी रखने के लिए सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को रिश्वत देने में भी इस्तेमाल किया जाता था। ईडी ने इस कथित घोटाले में अवैध गतिविधियों से अर्जित रकम लगभग 6,000 करोड़ रुपये आंकी है और गिरोह से जुड़ी भारत तथा विदेश में कई संपत्तियां कुर्क की हैं। छत्तीसगढ़ में बघेल के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान जब यह घोटाला सामने आया, तब से ईडी महादेव ऐप से जुड़े धनशोधन के कथित मामले की जांच कर रही है।