By नीरज कुमार दुबे | Sep 02, 2023
दिल्ली में अगले सप्ताह होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भले अपने आने या नहीं आने के बारे में संशय बरकरार रखा है लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की भारत यात्रा का कार्यक्रम जारी हो गया है। हम आपको बता दें कि इस शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भाग नहीं लेंगे। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव अपने देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
व्हाइट हाउस के बयान के अनुसार, बाइडन आगामी शुक्रवार को मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इसमें बताया गया कि नौ और दस सिंतबर को राष्ट्रपति जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जिसमें सदस्य देशों के नेता स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और जलवायु परिवर्तन से निपटने सहित अन्य अहम वैश्विक मुद्दों को संबोधित करने के लिए उठाए जा रहे संयुक्त कदमों पर चर्चा करेंगे। बयान के मुताबिक, जी20 देशों के नेता यूक्रेन पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आक्रमण के आर्थिक एवं सामाजिक प्रभावों का भी आकलन करेंगे। इसमें कहा गया है कि जी20 नेता वैश्विक चुनौतियों से निपटने और गरीबी से बेहतर ढंग से लड़ने के लिए विश्व बैंक सहित अन्य बहुपक्षीय विकास बैंकों की क्षमता बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा करेंगे।
व्हाइट हाउस के बयान के अनुसार, नयी दिल्ली की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति बाइडन प्रधानमंत्री मोदी के जी20 समूह के नेतृत्व की भी सराहना करेंगे। वह आर्थिक सहयोग के प्रमुख मंच के रूप में जी20 के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करेंगे, जिसमें 2026 में समूह की मेजबानी भी शामिल है।
हम आपको बता दें कि जी20 दुनिया की प्रमुख विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतरसरकारी मंच है। इसके सदस्य देश लगभग 85 फीसदी वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), 75 फीसदी के आसपास वैश्विक कारोबार और करीब दो-तिहाई वैश्विक आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। व्हाइट हाउस के मुताबिक, बाइडन दस सितंबर को वियतनाम की राजधानी हनोई जाएंगे। व्हाइट हाउस ने कहा, “हनोई में बाइडन अमेरिका और वियतनाम के बीच सहयोग को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा करने के लिए राष्ट्रपति न्गुयेन फु त्रोन और अन्य प्रमुख नेताओं से मिलेंगे।” व्हाइट हाउस के अनुसार, ''नेता प्रौद्योगिकी-केंद्रित और नवाचार-आधारित वियतनामी अर्थव्यवस्था के विकास को बढ़ावा देने, शिक्षा आदान-प्रदान एवं कार्यबल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों के बीच संबंधों का विस्तार करने, जलवायु परिवर्तन से निपटने और शांति, समृद्धि एवं स्थिरता लाने के अवसरों पर भी मंथन करेंगे।''