जस्टिस वर्मा कैश कांड को लेकर SC में बड़ी सुनवाई, कपिल सिब्बल से लेकर लूथरा तक… मैदान में दिग्गज वकीलों की फौज

By अभिनय आकाश | Jul 28, 2025

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई शुरू की। न्यायमूर्ति वर्मा ने आंतरिक न्यायिक जाँच के निष्कर्षों को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पर अधजले नोट मिलने के संबंध में कदाचार का दोषी ठहराया गया था। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की पीठ ने याचिका की रूपरेखा और न्यायाधीश के आचरण पर तीखे सवाल उठाए। याचिका में आंतरिक पैनल के निष्कर्षों और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने की सिफारिश को अमान्य ठहराने की मांग की गई है। यह घटना 14-15 मार्च, 2024 की है, जब दिल्ली पुलिस को न्यायाधीश के सरकारी बंगले के अंदर अधजली नकदी मिली थी। 

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सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण क्षण तब आया जब अदालत ने सिब्बल से पूछा कि जाँच रिपोर्ट कहाँ भेजी गई है। जब सिब्बल ने जवाब दिया कि रिपोर्ट भारत के राष्ट्रपति को भेजी गई है, तो अदालत ने आगे पूछा: "आपको क्यों लगता है कि राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजना समस्याजनक है? पीठ ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद को रिपोर्ट सौंपना मुख्य न्यायाधीश द्वारा महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने के लिए संसद को "प्रभावित करने" के समान नहीं है। अदालत ने ज़ोर देकर कहा कि यह संचार स्वाभाविक रूप से असंवैधानिक या पूर्वाग्रहपूर्ण नहीं था।

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