By अभिनय आकाश | Apr 01, 2026
जब रास्ता बंद होता है तो समझदार देश दूसरा रास्ता खोज लेते हैं। मिडिल ईस्ट में जंग, हॉर्मोज स्ट्रेट पर खतरा और भारत के किचन तक पहुंचती गैस की किल्लत। अब तस्वीर बदलने वाली है क्योंकि बता दें कि भारत ने उठा लिया है एक सबसे बड़ा कदम। खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने की तैयारी कर ली गई है और अब नजर टिक गई है अफ्रीका के एक ऐसे देश पर जिसका नाम आपने कम सुना होगा यानी कि अंगोला। जी हां, भारत अब अंगोला से एलपीजी यानी कि रसोई गैस खरीदने की तैयारी कर रहा है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर अंगोला ही क्यों चुना गया? क्या इससे गैस संकट खत्म होगा? क्या यह भारत की ऊर्जा रणनीति का गेम चेंजर बनने वाला है? दरअसल बता दें कि ईरान युद्ध और हॉर्मोन स्ट्रेट पर बढ़ते तनाव के बीच भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती है ऊर्जा सुरक्षा। क्योंकि आज की सच्चाई बिल्कुल सामने है और वो यह है कि भारत अपनी लगभग 92% एलपीजी सप्लाई खाड़ी देशों से मंगाता है। जैसे कि यूएई, कतर, सऊदी अरब और कुवैत। और इन सभी सप्लाई का एक ही रास्ता है और वो है स्ट्रेट ऑफ हार्मोस जो सिर्फ 33 कि.मी. चौड़ा है। लेकिन दुनिया के करीब 20% तेल और गैस व्यापार का रास्ता भी यही है। यानी अगर यह रास्ता बंद हुआ तो सीधे असर भारत के किचन तक पहुंच सकता है। और यहीं से शुरू होती है भारत की नई रणनीति। सरकारी कंपनियां, इंडियन ऑयल और बाकी जो कंपनियां हैं जैसे कि बीपीसीएल, एचपीसीएल और गेट। अब अफ्रीकी देश अंगोला की सरकारी कंपनियों से एलपीजी खरीदने पर बातचीत कर रही है। रिपोर्ट्स जो सामने आई उसके मुताबिक भारत का लॉन्ग टर्म डील पर विचार चल रहा है। यानी अब भारत सिर्फ एक रीजन पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
सरकार ने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के मद्देनजर देश में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के कदम उठाए गए हैं। तेल एवं गैस मंत्रालय ने कहा कि सभी रिफाइनरीज पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है। मंत्रालय ने कहा कि सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों से कहा गया है कि वे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ रेस्टोरेंट, होटलों और कैंटीन सहित कमर्शल उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन देने को भी प्राथमिकता दें, जिससे कमर्शल एलपीजी की उपलब्धता से जुड़ी चिंता दूर हो सके। मंत्रालय ने कहा कि इसके साथ ही नैशनल पीएनजी ड्राइव 2.0 की अवधि अब बढ़ाकर 30 जून तक कर दी गई है, जिससे पीएनजी नेटवर्क को बढ़ावा मिल सके। यह अभियान इस साल पहली जनवरी को शुरू किया गया था और इसकी अवधि 31 मार्च को पूरी हो रही थी।