By अभिनय आकाश | Feb 02, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को आय से अधिक संपत्ति के मामले में जमानत दे दी। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि वे पिछले सात महीनों से हिरासत में हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देते हुए मजीठिया की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें हाई कोर्ट ने पहले उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में मजीठिया की हिरासत की अवधि को ध्यान में रखा। पंजाब के पूर्व मंत्री को पिछले साल 25 जून को पंजाब सतर्कता ब्यूरो ने उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक लगभग 540 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा करने के आरोपों के संबंध में गिरफ्तार किया था।
पिछले साल 4 दिसंबर को दिए गए अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने मजीठिया की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उनके द्वारा चल रही जांच को प्रभावित करने की संभावना है। साथ ही, न्यायालय ने सतर्कता ब्यूरो को तीन महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया था और कहा था कि मजीठिया उस अवधि के बाद जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। मजीठिया के खिलाफ मामला 2021 के एक मादक पदार्थों से संबंधित मामले से जुड़ी एक व्यापक जांच का हिस्सा है, जिसकी जांच पंजाब पुलिस की एक विशेष जांच टीम कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान, मजीठिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एस मुरलीधर ने बताया कि याचिकाकर्ता को पहले मादक पदार्थ एवं मनोविकार पदार्थ अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज एक मामले में जमानत दी गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने पहले पंजाब सरकार द्वारा उस जमानत आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।
बिक्रम सिंह मजीठिया शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। उन्होंने मजीठा से पंजाब के विधायक के रूप में कार्य किया (2007-2022)। उन्होंने पंजाब सरकार में राजस्व, पर्यावरण, जल आपूर्ति और जनसंपर्क सहित कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। मजीठिया, एसएडी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के बहनोई और बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल के भाई हैं।