By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 28, 2026
बिहार सरकार ने बाढ़ की तैयारियों को मजबूत करने और बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए बांधों की सुरक्षा का व्यापक आकलन आठ महीने के भीतर पूरा करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में जल संसाधन विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्रस्ताव में कहा गया है कि बांध टूटने की स्थिति में संभावित जलमग्न क्षेत्रों का नक्शा तैयार करने के लिए ‘डैम ब्रेक एनालिसिस’ किया जाएगा।
मंत्रिमंडल ने राज्य में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए अगले तीन वर्षों में निम्न-दाब (एलटी) बिजली वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 11,096.55 करोड़ रुपये की योजना को भी मंजूरी दी। ऊर्जा विभाग के स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार, राज्य में बिजली की अधिकतम मांग 2012 के 1,802 मेगावाट से बढ़कर 9,475 मेगावाट हो गई है। इससे मौजूदा बिजली वितरण ढांचे पर दबाव बढ़ा है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि पहले की योजनाओं के तहत लगाए गए कम क्षमता वाले ‘एलटी एरियल बंच्ड’ (एबी) केबल और वितरण ट्रांसफार्मर पर अत्यधिक भार पड़ रहा है। ऐसे में उनकी क्षमता बढ़ाना आवश्यक हो गया है। मंत्रिमंडल विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने प्रेसवार्ता में बताया कि सरकार ने ‘उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड’ (एनबीपीडीसीएल) और ‘दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ’(एसबीपीडीसीएल) को राज्य सरकार की गारंटी पर वित्तीय संस्थानों और बैंकों से ऋण लेने की अनुमति देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।
इसके तहत एनबीपीडीसीएल 6,066 करोड़ रुपये और एसबीपीडीसीएल 5,030.55 करोड़ रुपये जुटाएगी। इस राशि का इस्तेमाल बिजली वितरण नेटवर्क को मजबूत करने की योजना के क्रियान्वयन में किया जाएगा। मंत्रिमंडल ने बिहार एमएसएमई नीति, 2026 को भी मंजूरी दी।
इस नीति का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एक करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाना और एक करोड़ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित करना है। ‘एक करोड़ उद्यमी परिवार—समृद्ध बिहार की नींव’ की परिकल्पना पर आधारित इस नीति को उद्योग विभाग ने आठ अक्टूबर को जारी किया था, जिसके बाद इसे राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिली। नीति के तहत बिहार के साख-जमा अनुपात को बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने, राज्य के प्रत्येक जिले में कम से कम एक औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने और सभी 38 जिलों में एमएसएमई केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राज्य सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और चक्रीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए जैव ईंधन एवं संपीड़ित जैव गैस (सीबीजी) उत्पादन प्रोत्साहन नीति, 2026 के क्रियान्वयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। मंत्रिपरिषद ने इस संबंध में एक प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस नीति के क्रियान्वयन के लिए उद्योग विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जबकि उद्योग निदेशक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
नीति का उद्देश्य कृषि अवशेषों, पशु अपशिष्ट, नगरपालिका के ठोस कचरे और चीनी मिलों से निकलने वाले प्रेसमड का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर सीबीजी और जैव ईंधन परियोजनाओं को बढ़ावा देना है। मंत्रिमंडल ने पटना में भूमिगत सड़क कॉरिडोर विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन कराने के लिए 18.21 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले प्रस्ताव को प्रशासनिक स्वीकृति भी प्रदान की। इस व्यवहार्यता अध्ययन में शहर के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाले भूमिगत मार्गों के विकास की संभावनाओं की जांच की जाएगी।
इनमें आर ब्लॉक चौराहे से कंकड़बाग और डाकबंगला चौराहे से पटना वीमेंस कॉलेज तक भूमिगत मार्ग विकसित करने के विकल्प शामिल हैं। इसके अलावा शहर के अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को जोड़ने की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा।