केंद्र के रुख से बिहार को लगा झटका, नहीं होगी जाति आधारित जनगणना, राजनीति शुरू

By अंकित सिंह | Jul 23, 2021

जाति आधारित जनगणना को लेकर बिहार की दो प्रमुख दल राजद और जदयू की राय लगभग एक जैसी है। यह दोनों दल लगातार जाति आधारित जनगणना की मांग करते रहे हैं। दोनों दलों का कहना है कि जनगणना में जाति का कॉलम अवश्य ही होना चाहिए। इन सब के बीच केंद्र सरकार के फैसले के बाद से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विपक्षी दल राजद को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, केंद्र सरकार ने साफ कह दिया है कि देश में जाति आधारित जनगणना नहीं कराई जाएगी। लोकसभा में एक लिखित जवाब में केंद्र सरकार की ओर से ये बातें कही गई। सरकार के इस फैसले के बाद राजद और जदयू की ओर से लंबे समय से की जा रही इस मांग को करारा झटका लगा है। आजादी के बाद से कुछ दल लगातार जाति आधारित जनगणना की वकालत करते रहें हैं। इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा था कि आबादी के हिसाब से अगर जाति की गणना होती है तो इससे पता चलेगा कि किस जाति को कितनी सुविधा दी जानी है। लेकिन फिलहाल केंद्र सरकार के फैसले से अति आधारित जनगणना पर झटका लगा है।

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केंद्र द्वारा संसद में ‘ केवल अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों’ की गणना का प्रस्ताव होने सबंधी जानकारी देने के एक दिन बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने उसी तर्ज पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी)की आबादी की भी गणना कराने की मांग की है। इस संबंध में जदयू के ससंदीय बोर्ड के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की ओर से बयान जारी किया गया। उन्होंने न्यायपालिका में भी आरक्षण की मांग की है। नीतीश कुमार के धुर विरोधी और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद भी इस मुद्दे पर जदयू के विचार से सहमत है। हालांकि, जदयू का इस मुद्दे पर रुख केंद्र और राज्य में सहयोगी भाजपा के साथ एक और वैचारिक मतभेद को इंगित करता है। भाजपा को बड़ी संख्या में अगड़ी जातियों का समर्थन मिलता है। 

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इस मामले में राजद नेता तेजस्वी यादव  ने कहा, "बिहार के दोनों सदनों में BJP जातीय जनगणना का समर्थन करती है लेकिन संसद में बिहार के ही कठपुतली मात्र पिछड़े वर्ग के राज्यमंत्री से जातीय जनगणना नहीं कराने का एलान कराती है। केंद्र सरकार OBC की जनगणना क्यों नहीं कराना चाहती? BJP को पिछड़े/अतिपिछड़े वर्गों से इतनी नफ़रत क्यों है? कुत्ता-बिल्ली,हाथी-घोड़ा,शेर-सियार, साइकिल-स्कूटर सबकी गिनती होती है। कौन किस धर्म का है,उस धर्म की संख्या कितनी है इसकी गिनती होती है लेकिन उस धर्म में निहित वंचित,उपेक्षित और पिछड़े समूहों की संख्या गिनने में क्या परेशानी है? उनकी जनगणना के लिए फ़ॉर्म में महज एक कॉलम जोड़ना है। उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना के लिए हमारे दल ने लंबी लड़ाई लड़ी है और लड़ते रहेंगे।यह देश के बहुसंख्यक यानि लगभग 65 फ़ीसदी से अधिक वंचित, उपेक्षित, उपहासित, प्रताड़ित वर्गों के वर्तमान और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। BJP सरकार पिछड़े वर्गों के हिंदुओं को क्यों नहीं गिनना चाहती? क्या वो हिंदू नहीं है?"

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